छत्तीसगढ़ के कवर्धा में अवैध खनन का खेल खुलेआम चल रहा है। दलदली बॉक्साइट खदान के आसपास नदी-नालों को निशाना बनाकर हजारों टन बॉक्साइट पत्थर निकाला जा रहा है। बीते पंद्रह दिनों से इलाके में दिन-रात जेसीबी और पोकलेन मशीनें गूंज रही हैं—पत्थर निकाले जा रहे हैं, मौके पर ही गिट्टी बनाई जा रही है और फिर ट्रकों से सप्लाई की जा रही है। इस पूरी गतिविधि से शासन-प्रशासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान बताया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार महकमे खामोश दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध कारोबार के लिए मध्य प्रदेश से 50 से 60 मजदूर बुलाए गए हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर तोड़ाई कराई जा रही है। भारी मशीनों की लगातार आवाजाही और बाहरी मजदूरों की मौजूदगी के बावजूद किसी स्तर पर रोक-टोक नहीं दिख रही। स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन का दायरा नदी-नालों के करीब तक फैल गया है, जिससे पर्यावरणीय नुकसान की आशंका भी बढ़ गई है।
सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले पर खनिज विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या यह सब विभागीय मिलीभगत से हो रहा है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? जब अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो यही कहा गया कि वे नए हैं और जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह है कि जांच कब शुरू होगी और तब तक इस अवैध खेल पर कौन लगाम लगाएगा?