सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में कमजोरी साफ नजर आई और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। कमजोर वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और कुछ बड़ी कंपनियों के निराशाजनक तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया। कारोबार के अंत में BSE Sensex 324 अंक टूटकर 83,246 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NIFTY 50 25600 का अहम स्तर गंवाते हुए 108 अंक गिरकर 25,585 पर आ गया।
बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल माहौल रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के नए टैरिफ बयान से एक बार फिर ट्रेड वॉर की आशंका तेज हो गई है। ट्रंप ने डेनमार्क, जर्मनी और फ्रांस समेत आठ यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है, जिसे जून तक 25% तक बढ़ाया जा सकता है। इसका असर यूरोपीय और एशियाई बाजारों पर साफ दिखा, जहां डैक्स और EUROSTOXX 50 फ्यूचर्स करीब 1% गिरे, जबकि जापान का निक्केई भी कमजोर बंद हुआ।
अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। Federal Reserve के अगले चेयर को लेकर सस्पेंस बाजार पर भारी पड़ा। यह साफ नहीं है कि केविन हैसेट को यह जिम्मेदारी मिलेगी या नहीं, जिससे दरों में कटौती को लेकर उम्मीदें कमजोर हुईं और ग्लोबल सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर पड़ा।
घरेलू स्तर पर डर का पैमाना माने जाने वाला India VIX भी 5% से ज्यादा उछलकर 11.98 पर पहुंच गया। यह संकेत है कि निवेशक फिलहाल सतर्क मोड में हैं और जोखिम लेने से बच रहे हैं। इसी के साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने दबाव और बढ़ा दिया। एफआईआई लगातार नौवें सत्र में शुद्ध विक्रेता रहे और जनवरी में अब तक करीब 22,500 करोड़ रुपये बाजार से निकाल चुके हैं।
सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव दिखा। कमजोर आउटलुक के चलते Wipro के शेयर 7% से ज्यादा टूटे, जिससे पूरा आईटी इंडेक्स करीब 1% गिर गया। इसके अलावा ICICI Bank के शेयर भी ज्यादा प्रावधानों की वजह से करीब 3% फिसले। टाटा मोटर्स पीवी और मैक्स हेल्थकेयर जैसे बड़े शेयर भी नुकसान में रहे।
तकनीकी नजरिए से देखा जाए तो निफ्टी में फिलहाल कमजोरी बनी हुई है। 25,875 और 26,000 के स्तर पर मजबूत रेजिस्टेंस दिख रहा है, जबकि नीचे की ओर 25,600 और 25,450 अहम सपोर्ट माने जा रहे हैं। कुल मिलाकर बाजार पर ग्लोबल घटनाक्रम का असर हावी है और निवेशकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय संकेतों और एफआईआई की चाल पर टिकी हुई है।