हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में सोमवार की सुबह एक बार फिर दहशत के साथ शुरू हुई, जब भूकंप के झटकों ने लोगों को घरों और दफ्तरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। यह महज़ एक संयोग नहीं, बल्कि पिछले तीन दिनों में दूसरी बार है जब इस पूरे क्षेत्र में धरती कांपी है। भले ही इस बार झटकों की तीव्रता कम रही और किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई, लेकिन लगातार हो रही भूगर्भीय हलचल ने लोगों की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
नेशनल सिस्मोलॉजी सेंटर के मुताबिक, सोमवार सुबह करीब 8 बजकर 44 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के कुछ इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 मापी गई, जबकि इसका केंद्र उत्तरी दिल्ली बताया गया। भूकंप की गहराई जमीन के सिर्फ 5 किलोमीटर नीचे थी, यही वजह रही कि सोनीपत समेत दिल्ली से सटे हरियाणा के कई इलाकों में लोगों ने साफ तौर पर कंपन महसूस किया। सुबह-सुबह अचानक धरती हिलने से लोग घबराकर बाहर निकल आए।
इससे पहले 16 जनवरी 2026 को भी हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना क्षेत्र में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए थे। उस समय रिक्टर स्केल पर तीव्रता 3.5 दर्ज की गई थी, जो आज के झटकों से ज्यादा थी। उस घटना में लोग घरों, दुकानों और दफ्तरों से निकलकर खुले मैदानों की ओर भागते नजर आए थे। अब तीन दिन के भीतर दोबारा धरती हिलने से पुराने डर एक बार फिर ताजा हो गए हैं।
अगर पिछले कुछ महीनों का रिकॉर्ड देखा जाए तो हरियाणा में भूगर्भीय गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं। जून 2025 से लेकर अब तक राज्य के अलग-अलग जिलों में कई बार भूकंप के झटके दर्ज किए गए हैं। कहीं हल्की तीव्रता रही तो कहीं मध्यम स्तर के झटकों ने लोगों को डराया। झज्जर, रोहतक, फरीदाबाद, महेंद्रगढ़ और सोनीपत जैसे जिले बार-बार इस कंपन की चपेट में आ चुके हैं। अगस्त 2025 में झज्जर के बीड़ सुनार गांव में आए 3.1 तीव्रता के भूकंप से मकानों में दरारें तक पड़ गई थीं, जिससे यह साफ हो गया था कि कम तीव्रता के झटके भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
भूकंप वैज्ञानिकों के अनुसार हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में बार-बार धरती हिलने की एक बड़ी वजह जमीन के नीचे मौजूद फॉल्ट लाइन है। उत्तराखंड के देहरादून से लेकर हरियाणा के महेंद्रगढ़ तक एक लंबी भूगर्भीय दरार फैली हुई है। जब भी टेक्टोनिक प्लेट्स में हलचल होती है या उनके बीच दबाव बढ़ता है, तो इसी फॉल्ट लाइन के आसपास कंपन पैदा होता है। यही कंपन भूकंप के झटकों के रूप में सतह पर महसूस किया जाता है।
वैज्ञानिक बताते हैं कि पृथ्वी सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेट्स पर टिकी हुई है। ये प्लेट्स स्थिर नहीं रहतीं, बल्कि पृथ्वी के भीतर मौजूद गर्मी और ऊर्जा के कारण धीरे-धीरे खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे के ऊपर चढ़ने की कोशिश करती हैं, तो किनारों पर जबरदस्त दबाव बनता है। यही दबाव जब अचानक निकलता है, तो धरती कांप उठती है।
हालांकि ताजा भूकंप की तीव्रता कम थी, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि बार-बार आने वाले छोटे झटके इस बात का संकेत हैं कि जमीन के भीतर ऊर्जा का दबाव लगातार बन रहा है। ऐसे में पुरानी और कमजोर इमारतों के लिए यह स्थिति खतरे की घंटी हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने की बजाय सतर्क रहने की जरूरत है और भूकंप से जुड़ी सुरक्षा सावधानियों को गंभीरता से अपनाना चाहिए।