भारतीय क्रिकेट में एक बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। BCCI अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम को पूरी तरह री-डिज़ाइन करने की तैयारी में है और अगर प्रस्तावित मॉडल को मंजूरी मिलती है, तो इसके सबसे बड़े असर की जद में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज़ विराट कोहली और रोहित शर्मा आ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों सीनियर खिलाड़ियों को मौजूदा A+ ग्रेड से सीधे ग्रेड-B में शिफ्ट किए जाने की सिफारिश की गई है, जिसे क्रिकेट गलियारों में ‘बड़ा डिमोशन’ माना जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि यह प्रस्ताव सेलेक्शन कमेटी के चेयरमैन अजित अगरकर की अगुआई में तैयार किया गया है। कमेटी ने मौजूदा चार-स्तरीय कॉन्ट्रैक्ट ढांचे को खत्म कर केवल तीन ग्रेड—A, B और C—लागू करने का सुझाव दिया है। सबसे अहम बदलाव यह होगा कि A+ ग्रेड को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इस पर अंतिम फैसला बीसीसीआई की अगली एपेक्स काउंसिल बैठक में लिया जाना है।
प्रस्ताव की दिशा साफ संकेत देती है कि बोर्ड अब मल्टी-फॉर्मेट खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने के मूड में है। यानी जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट—टेस्ट, वनडे और टी20—में नियमित भूमिका निभाते हैं, उनके लिए टॉप ग्रेड की राह आसान होगी। इसके उलट, सीमित फॉर्मेट या एक ही फॉर्मेट खेलने वाले खिलाड़ियों को शीर्ष ग्रेड में जगह मिलना मुश्किल हो जाएगा। यही वजह है कि फिलहाल केवल वनडे क्रिकेट खेल रहे विराट कोहली और रोहित शर्मा को ग्रेड-B में रखने की बात सामने आ रही है।
वर्तमान सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम में खिलाड़ियों को A+, A, B और C—चार कैटेगरी में रखा जाता है। A+ ग्रेड में सालाना 7 करोड़ रुपये, A ग्रेड में 5 करोड़, B ग्रेड में 3 करोड़ और C ग्रेड में 1 करोड़ रुपये मिलते हैं, जबकि मैच फीस अलग से होती है। 2024–25 की कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट, जो अप्रैल 2025 में जारी हुई थी, उसमें विराट कोहली, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और जसप्रीत बुमराह A+ ग्रेड में थे। ग्रेड-A में मोहम्मद सिराज, केएल राहुल, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, मोहम्मद शमी और ऋषभ पंत शामिल थे।
ग्रेड-B में सूर्यकुमार यादव, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, यशस्वी जायसवाल और श्रेयस अय्यर जैसे नाम थे, जबकि ग्रेड-C में रिंकू सिंह, ईशान किशन, संजू सैमसन, अर्शदीप सिंह सहित कई युवा खिलाड़ियों को जगह मिली थी। नए प्रस्ताव से यह साफ होता है कि बोर्ड अब कॉन्ट्रैक्ट को परफॉर्मेंस के साथ-साथ फॉर्मेट कमिटमेंट से जोड़ना चाहता है।
अगर यह बदलाव लागू होता है, तो यह भारतीय क्रिकेट के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट इतिहास का सबसे बड़ा फेरबदल माना जाएगा—जहां स्टारडम से ज्यादा प्राथमिकता निरंतरता और बहु-फॉर्मेट योगदान को मिलेगी। अब सबकी निगाहें बीसीसीआई की एपेक्स काउंसिल पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है।