रायपुर में बीपीएल राशन संकट गहराया: 27 हजार क्विंटल की जरूरत, गोदामों में सिर्फ 7 हजार क्विंटल स्टॉक

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रायपुर की कई उचित मूल्य दुकानों पर इन दिनों बीपीएल कार्डधारी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं। वजह साफ है—बीपीएल कोटे का चावल उपलब्ध नहीं है। राजधानी की दर्जनों दुकानों में चावल खत्म हो चुका है और आपूर्ति की रफ्तार इतनी धीमी है कि हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक चालू माह में लगभग 27 हजार क्विंटल बीपीएल चावल की जरूरत है, जबकि छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के गुढ़ियारी और मंदिर हसौद गोदामों में महज 7 हजार क्विंटल का स्टॉक बचा है। इसी कमी ने पूरे वितरण तंत्र को जाम कर दिया है।

जमीनी पड़ताल में सामने आया कि कई दुकानों ने दिनों पहले गोदामों में डिमांड भेज दी थी, इसके बावजूद भंडारण नहीं हो सका। दुकानदारों का कहना है कि महीने के खत्म होने में अब गिनती के दिन बचे हैं और बीच में अवकाश भी पड़ रहे हैं। ऐसे में शेष दिनों में सभी हितग्राहियों तक चावल पहुंचा पाना मुश्किल दिख रहा है। समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि माह समाप्त होते ही उस महीने का राशन बांटने का विकल्प सॉफ्टवेयर में बंद हो जाता है, जिससे कई परिवार इस माह चावल से वंचित रह सकते हैं।

अफसरों के अतिरिक्त प्रभार ने भी हालात को और उलझा दिया है। राजधानी होने के बावजूद रायपुर नान में लंबे समय से स्थायी डीएम की नियुक्ति नहीं है। फिलहाल जिम्मेदारी अतिरिक्त प्रभार पर है, जिससे निगरानी और समन्वय में ढिलाई की शिकायतें सामने आ रही हैं। दुकानदारों का आरोप है कि गोदाम से लेकर फील्ड तक निर्णय लेने में देरी हो रही है, जिसका खामियाजा सीधे बीपीएल परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

शहर की दो दर्जन से अधिक दुकानों में कहीं केवल बीपीएल तो कहीं एपीएल-बीपीएल दोनों का चावल खत्म हो चुका है। संचालकों ने वाट्सऐप ग्रुप के जरिए गोदाम प्रभारियों और खाद्य निरीक्षकों को बार-बार सूचित किया, लेकिन अब तक आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। कुछ दुकानों में शक्कर और नमक की कमी भी सामने आई है, जिससे वितरण और ज्यादा बाधित हुआ है।

रायपुर जिले में प्रदेश की सर्वाधिक—करीब 718—राशन दुकानें संचालित हैं। इसके बावजूद दो जिलों का अतिरिक्त प्रभार संभालने की व्यवस्था से फील्ड में उपस्थिति और निर्णय क्षमता प्रभावित होने की बात कही जा रही है। दुकानदारों के अनुसार, अधिकारी सीमित दिनों के लिए ही जिले में उपलब्ध रहते हैं, जिससे त्वरित समाधान नहीं निकल पाता।

छत्तीसगढ़ पीडीएस संघ के अध्यक्ष नरेश बाफना का कहना है कि समय पर भंडारण न होने से दुकान संचालकों को हितग्राहियों और जनप्रतिनिधियों का गुस्सा झेलना पड़ता है, जबकि गलती सप्लाई चेन की होती है। वहीं प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है। रायपुर खाद्य नियंत्रक भूपेंद्र मिश्रा के मुताबिक एक-दो दिन में चावल की आपूर्ति शुरू हो जाएगी और मांग के अनुरूप भंडारण किया जाएगा।

फिलहाल, बीपीएल परिवारों की निगाहें गोदामों से निकलने वाली अगली खेप पर टिकी हैं। आपूर्ति समय पर बहाल होती है या नहीं—यही तय करेगा कि इस महीने कितने परिवारों की रसोई में चावल पहुंचेगा।

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