नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग को वर्ष 2024-25 के लिए मध्य क्षेत्र का ‘नराकास राजभाषा, सम्मान’ तृतीय पुरस्कार

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राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 20 जनवरी 2026 को देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, तक्षशिला परिसर, इंदौर (मध्यप्रदेश) में आयोजित मध्य, पश्चिम तथा दक्षिणी क्षेत्रों के ‘संयुक्त क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह’ में नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग को वर्ष 2024-25 के लिए मध्य क्षेत्र का ‘नराकास राजभाषा, सम्मान’ तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

समारोह के मुख्य अतिथि श्री बंडी संजय कुमार, केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री के करकमलों द्वारा नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग की ओर से यह पुरस्कार  कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), भिलाई इस्पात संयंत्र, श्री पवन कुमार ने ग्रहण किया।

समारोह के विशिष्ट अतिथि श्री शंकर लालवाणी, सांसद, इंदौर ने श्री सौमिक डे, महाप्रबंधक (मानव संसाधन), सचिवालय, कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन), भिलाई इस्पात संयंत्र को तत्कालीन सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग के रूप में सराहनीय कार्यों के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

इस अवसर पर भिलाई इस्पात संयंत्र की ओर से श्री राजीव कुमार, महाप्रबंधक (संपर्क व प्रशासन एवं जनसंपर्क), भिलाई इस्पात संयंत्र तथा वर्तमान सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग और श्री जितेन्द्र दास मानिकपुरी, उप प्रबंधक (संपर्क व प्रशासन – राजभाषा) भिलाई इस्पात संयंत्र, उपस्थित थे।

भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग द्वारा देश भर के उपक्रमों, प्रतिष्ठानों एवं विभागों में समस्त कार्यालयीन कामकाज राजभाषा हिंदी में किया जाना सुनिश्चित करने तथा केन्द्र सरकार की राजभाषा नीति के कार्यान्वयन हेतु पूरे भारत के विभिन्न नगरों में कुल 537 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियों का गठन किया गया है। मध्य क्षेत्र में कुल 71 नगर राजभाषा कार्यान्वयन समितियाँ हैं, जिनमें से वर्ष 2024-25 के लिए मध्य क्षेत्र का ‘नराकास राजभाषा, सम्मान’ तृतीय पुरस्कार भिलाई-दुर्ग के नराकास को प्रदान किया गया है।

पुरस्कार प्राप्ति पर श्री चित्त रंजन महापात्र, निदेशक प्रभारी, भिलाई इस्पात संयंत्र एवं अध्यक्ष, ‘नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, भिलाई-दुर्ग’ ने बधाई दी है तथा इसे समिति के सभी सदस्य संस्थानों के हिंदी के प्रति अनुराग, समर्पण, राजभाषा नीति का अनुपालन एवं हिंदी में समस्त कार्यालयीन कार्य करने की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया है।

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