लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Bar Council of India ने ऑल इंडिया बार एग्जाम यानी All India Bar Examination को लेकर अहम फैसला लिया है। अब यह परीक्षा साल में सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दो बार आयोजित की जाएगी। इस फैसले से देशभर के लॉ ग्रेजुएट्स और छात्रों को करियर प्लानिंग में बड़ी सहूलियत मिलने वाली है। बीसीआई ने मंगलवार को Supreme Court of India को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद यह मामला चर्चा में आ गया।
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सामने आया। सुनवाई 2024 में दायर निलय राय एवं अन्य की याचिका से जुड़ी थी, जिसमें अंतिम वर्ष के लॉ छात्रों को भी एआईबीई में बैठने की अनुमति देने की मांग की गई थी। इस पर बीसीआई ने अदालत को बताया कि परीक्षा की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ पात्रता नियमों में भी अहम बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि छात्रों को अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
बीसीआई के नए निर्णय के अनुसार अब 3 वर्षीय एलएलबी और 5 वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर में पढ़ रहे छात्र भी ऑल इंडिया बार एग्जाम में शामिल हो सकेंगे। पहले तक यह परीक्षा केवल डिग्री पूरी कर चुके छात्रों के लिए ही आयोजित की जाती थी, जिसके कारण कई छात्रों को एक साल तक इंतजार करना पड़ता था। नए नियम से यह बाधा खत्म हो जाएगी और लॉ स्टूडेंट्स समय पर वकालत के पेशे में कदम रख सकेंगे।
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक, बीसीआई का यह कदम छात्रों के हित में तो है ही, साथ ही इससे न्यायिक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। साल में दो बार एआईबीई आयोजित होने से न केवल नए उम्मीदवारों को जल्दी अवसर मिलेगा, बल्कि असफल रहने वाले छात्रों को भी दोबारा मौका पाने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे योग्य और प्रशिक्षित वकीलों की उपलब्धता भी समय पर सुनिश्चित हो सकेगी।
अब लॉ स्टूडेंट्स को सलाह दी जा रही है कि वे बीसीआई की आधिकारिक अधिसूचनाओं पर नजर बनाए रखें, ताकि परीक्षा की तारीख, आवेदन प्रक्रिया और नए दिशा-निर्देशों से जुड़ी हर अपडेट उन्हें समय पर मिल सके। कुल मिलाकर, यह फैसला लॉ छात्रों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक और दूरगामी बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।