छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बड़ी गड़बड़ी के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। राज्य में छह हजार आरक्षक पदों पर चल रही भर्ती के दौरान ऐसी चूक सामने आई, जिसकी वजह से करीब 1500 पद अब भी खाली रह गए हैं। यह मामला तब उजागर हुआ जब भर्ती के विभिन्न चरण पूरे होने के बावजूद नियुक्तियों का आंकड़ा तय संख्या तक नहीं पहुंच सका। बताया जा रहा है कि यह स्थिति जिलों में कॉमन टेस्ट और कॉमन कोड व्यवस्था के कारण पैदा हुई।
जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय की ओर से आरक्षकों के छह हजार पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। व्यवस्था यह रखी गई कि हर जिले के लिए एक कॉमन कोड जनरेट किया जाए। यहीं से गड़बड़ी की नींव पड़ी। कई अभ्यर्थियों ने इसी व्यवस्था का फायदा उठाते हुए एक साथ दो से चार जिलों में आवेदन कर दिया। जब फिजिकल टेस्ट और अन्य चयन प्रक्रियाएं पूरी हुईं, तो एक ही अभ्यर्थी एक जिले में चयनित हो गया, लेकिन जिन अन्य जिलों में उसने आवेदन किया था, वहां वही सीटें खाली रह गईं। इसी प्रक्रिया की वजह से कुल छह हजार में से लगभग 1500 पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी।
पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह सच है कि एक ही अभ्यर्थी का नाम एक से अधिक जिलों की सूची में आने के कारण कई पद रिक्त रह गए हैं। हालांकि भर्ती का अगला चरण अभी भी जारी है। इसी क्रम में अब तक करीब 1700 चयनित उम्मीदवारों की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, जब अंतिम रूप से अनुप्रमाणन पत्र भरे जाएंगे, तब यह स्पष्ट हो पाएगा कि किस जिले में वास्तव में कितने पद खाली बचे हैं।
इस पूरे मामले को भर्ती प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की एक बड़ी प्रशासनिक चूक माना जा रहा है। अगर शुरुआत में ही हर जिले के लिए अलग-अलग कोड जारी किए जाते या यह स्पष्ट कर दिया जाता कि एक अभ्यर्थी केवल एक ही जिले के लिए आवेदन कर सकता है, तो यह स्थिति पैदा नहीं होती। अब इस गलती का सीधा असर पुलिस बल की संख्या और जिलों में तैनाती पर पड़ता दिख रहा है।
राजधानी Raipur समेत कई जिलों में इस भर्ती प्रक्रिया को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या खाली रह गए इन 1500 पदों को भरने के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू की जाएगी या फिर इसे भविष्य की भर्तियों में समायोजित किया जाएगा। फिलहाल, यह मामला पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक गंभीर सवाल बनकर सामने आया है।