बीमा क्लेम ठुकराना पड़ा महंगा, बिलासपुर उपभोक्ता फोरम ने मैक्स लाइफ पर ठोका 1 करोड़ का हर्जाना

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कोविड-19 से हुई एक मौत के बीमा दावे को खारिज करना बीमा कंपनी को भारी पड़ गया। बिलासपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में Max Life Insurance को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए कंपनी को 2 लाख रुपये अतिरिक्त भुगतान करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यह फैसला बीमा कंपनियों की मनमानी पर बड़ी नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।

उपभोक्ता आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल तथा सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पांडे शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से माना कि बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर उपभोक्ता को अनावश्यक रूप से परेशान किया और नियमों का उल्लंघन किया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनियों को क्लेम निपटान में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दिखानी होगी, अन्यथा ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई तय है।

मामला बिलासपुर निवासी कौशल प्रसाद कौशिक से जुड़ा है, जिन्होंने अपनी पत्नी शैल कौशिक के नाम पर मैक्स लाइफ का प्लैटिनम वेल्थ प्लान लिया था। पॉलिसी जारी करने से पहले कंपनी ने सभी आवश्यक मेडिकल जांच करवाई थीं, जिनकी रिपोर्ट में शैल कौशिक पूरी तरह स्वस्थ पाई गई थीं। इसके बावजूद बाद में कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, जिसे आयोग ने गंभीर चूक माना।

सितंबर 2020 में शैल कौशिक कोविड-19 से संक्रमित हुईं और इलाज के दौरान 11 अक्टूबर 2020 को उनका निधन हो गया। इसके बाद पति ने बीमा दावा प्रस्तुत किया, लेकिन कंपनी ने यह कहकर क्लेम अस्वीकार कर दिया कि पॉलिसीधारक पहले से गंभीर बीमारी से ग्रसित थीं। उपभोक्ता आयोग ने इस तर्क को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मेडिकल जांच रिपोर्ट में किसी भी पूर्व बीमारी का उल्लेख नहीं है, इसलिए बीमा दावा ठुकराना पूरी तरह गलत और मनमाना था।

आयोग ने अपने फैसले में साफ कहा कि बीमा कंपनी का यह रवैया उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। इसी आधार पर कंपनी को 1 करोड़ रुपये की बीमा राशि, उस पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज और मानसिक पीड़ा व वाद खर्च के रूप में 2 लाख रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया गया। यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि बीमा कंपनियों के लिए भी एक सख्त संदेश माना जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के Bilaspur से आए इस फैसले के बाद उपभोक्ता अधिकारों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में बीमा क्लेम से जुड़े मामलों में एक मजबूत मिसाल बनेगा और कंपनियों को मनमानी से रोकने में अहम भूमिका निभाएगा।

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