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दावोस जाते वक्त बीच आसमान से लौटा ट्रंप का Air Force One, तकनीकी खराबी से मची हलचल

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की दावोस यात्रा उस वक्त चर्चा में आ गई, जब उन्हें ले जा रहा Air Force One विमान उड़ान के दौरान तकनीकी खराबी के कारण वापस लौट आया। बताया जा रहा है कि टेकऑफ के करीब एक घंटे बाद विमान में मामूली इलेक्ट्रिकल समस्या सामने आई, जिसके बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पायलटों ने विमान का रुख वॉशिंगटन स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज की ओर मोड़ दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से ट्रंप की World Economic Forum में प्रस्तावित मौजूदगी कुछ समय के लिए बाधित हो गई।

White House की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने जानकारी दी कि उड़ान के दौरान विमान में एक मामूली इलेक्ट्रिकल गड़बड़ी दर्ज की गई थी। किसी भी तरह का जोखिम न उठाते हुए पायलट और क्रू ने तुरंत एहतियाती फैसला लिया और विमान को सुरक्षित रूप से वापस उतारने का निर्णय किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही और किसी को कोई खतरा नहीं हुआ।

विमान में मौजूद एक पत्रकार के मुताबिक, उड़ान के कुछ ही समय बाद प्रेस केबिन की लाइट्स अचानक बंद हो गई थीं, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि थोड़ी देर बाद लाइट्स फिर से चालू हो गईं और हालात सामान्य हो गए। इस घटना को लेकर व्हाइट हाउस की ओर से अब तक कोई विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप अब किसी अन्य विमान के जरिए अपनी दावोस यात्रा पूरी करेंगे। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है, जब अंतरराष्ट्रीय मंच पर ट्रंप के बयानों को लेकर पहले से ही काफी हलचल है। हाल ही में उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि उनके खिलाफ किसी भी तरह की साजिश रची गई, तो अमेरिका सख्त जवाब देगा। इसके बाद ईरान की ओर से भी पलटवार करते हुए अमेरिका को अपने सर्वोच्च नेता के खिलाफ किसी कार्रवाई से आगाह किया गया था।

बताया जाता है कि अमेरिका के पास फिलहाल दो Air Force One विमान हैं, जिनमें से एक पिछले चार दशकों से सेवा में है। एयरोस्पेस दिग्गज Boeing नए Air Force One विमानों पर काम कर रही है, लेकिन यह परियोजना लगातार देरी का शिकार रही है। इसी बीच मई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने कतर के शाही परिवार से प्राप्त बोइंग 747-8 विमान को भविष्य के Air Force One के रूप में स्वीकार करने का फैसला किया था।

इस पूरी घटना ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान Air Force One की तकनीकी स्थिति और अमेरिका के राष्ट्रपति विमानों की सुरक्षा व्यवस्था पर खींच दिया है।

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