छत्तीसगढ़ भूमि गाइडलाइन 2025–26: गाँव से शहर तक जमीन का नया गणित, पारदर्शिता से कालाधन और विवादों पर ब्रेक

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छत्तीसगढ़ में भूमि प्रशासन को लेकर अब तक का सबसे बड़ा सुधार जमीन पर उतर चुका है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 के लिए नई भूमि गाइडलाइन दरें लागू कर दी हैं, जो 20 नवंबर 2025 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो चुकी हैं। करीब सात साल बाद हुए इस संशोधन को सरकार ऐतिहासिक मान रही है, क्योंकि इसका सीधा उद्देश्य जमीन के वास्तविक बाजार मूल्य और सरकारी मूल्य के बीच लंबे समय से बनी खाई को पाटना, पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और काले धन के लेनदेन पर रोक लगाना है। इस फैसले का असर किसानों से लेकर शहरी मध्यम वर्ग, निवेशकों और उद्योगों तक साफ दिखाई देने वाला है।

पिछले कई वर्षों से जमीन की सरकारी दरें बाजार की सच्चाई से काफी पीछे छूट चुकी थीं। इसका नतीजा यह था कि रजिस्ट्री में एक कीमत दिखाई जाती थी और असली सौदा कहीं और तय होता था। साय सरकार ने इस विसंगति को खत्म करने के लिए 2019–20 के बाद पहली बार गाइडलाइन दरों का व्यापक पुनरीक्षण किया। नई व्यवस्था में शहरी क्षेत्रों में औसतन करीब 20 प्रतिशत तक और ग्रामीण इलाकों में कुछ स्थानों पर 500 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। यह वृद्धि अचानक नहीं बल्कि बाजार व्यवहार, लोकेशन, सड़क कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों के आधार पर तय की गई है, जिससे जमीन की खरीद–फरोख्त अब ज्यादा यथार्थपरक हो सके।

ग्रामीण क्षेत्रों में यह बदलाव सबसे ज्यादा असरदार माना जा रहा है। लंबे समय से गांवों में जमीन के दाम तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन सरकारी दरें बेहद कम बनी हुई थीं। नई गाइडलाइन में मुख्य सड़कों से लगी भूमि की दरों में औसतन 109 प्रतिशत और अंदरूनी भूमि की दरों में 105 से 120 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। इससे एक ही तरह की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति वाले गांवों में अलग–अलग दरों का भ्रम खत्म हुआ है। इसका सीधा फायदा यह होगा कि भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और बैंक लोन के मामलों में किसानों को अब ज्यादा न्यायसंगत मूल्य मिल सकेगा।

शहरी इलाकों में भी सरकार ने जटिलताओं को कम करने पर जोर दिया है। पहले जमीन की गाइडलाइन कंडिकाएं इतनी ज्यादा थीं कि आम आदमी के लिए दरें समझना ही मुश्किल हो जाता था। अब कई नगरपालिकाओं में कंडिकाओं की संख्या 56 से घटाकर 26 कर दी गई है, वहीं नगर पंचायतों में यह संख्या 253 से घटकर 105 रह गई है। इससे एक ही इलाके में अलग–अलग रेट की समस्या लगभग खत्म हो गई है और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ी है।

8 दिसंबर 2025 के बाद लागू हुए नए मूल्यांकन नियमों ने इस सुधार को और मजबूत किया है। नगरीय क्षेत्रों में 1400 वर्ग मीटर तक के प्लॉट के लिए इंक्रीमेंटल सिस्टम को हटाकर पुराने स्लैब आधारित मॉडल को वापस लाया गया है, जिससे रजिस्ट्री का हिसाब सरल हो गया है। फ्लैट और ऑफिस जैसी संपत्तियों के मामले में भी सुपर बिल्ट–अप एरिया के बजाय फर्श आधारित दरों पर मूल्यांकन का प्रावधान किया गया है। इससे ऊपरी मंजिलों की रजिस्ट्री सस्ती होगी और मध्यम वर्ग को सीधा लाभ मिलेगा।

कृषि भूमि के मूल्यांकन में भी किसानों को बड़ी राहत दी गई है। अब दो फसली जमीन का मूल्यांकन बाजार दर पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़कर किया जाएगा। पहले कम सरकारी दरों के कारण किसानों को न तो सही मुआवजा मिल पाता था और न ही बैंकिंग सुविधाओं का पूरा लाभ। नई व्यवस्था से उनके आर्थिक हित ज्यादा सुरक्षित होंगे।

सरकार ने इस पूरे सुधार के साथ लैंड मैनेजमेंट को डिजिटल रूप देने पर भी जोर दिया है। करीब 30 साल पुराने पंजीयन रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिससे विवादों की संभावना कम हुई है और रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज हुई है। सभी उप–पंजीयक कार्यालय और ई–रजिस्ट्रेशन सिस्टम पूरी तरह सक्रिय हैं, और सरकार का दावा है कि नई दरों के बावजूद पंजीयन सेवाओं में कोई बाधा नहीं आई है।

सबसे अहम बात यह है कि नई गाइडलाइन दरें जमीन बाजार में स्थिरता लाने का काम करेंगी। पहले रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक सौदे के बीच भारी अंतर टैक्स चोरी और काले धन को बढ़ावा देता था। अब बाजार–अनुरूप दरें लागू होने से यह अंतर काफी हद तक खत्म होगा। निवेशकों को भरोसा मिलेगा, रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवादों में कमी आएगी।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ भूमि गाइडलाइन 2025–26 सिर्फ दरों में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि जमीन के पूरे इकोसिस्टम को साफ, भरोसेमंद और आधुनिक बनाने की कोशिश है। किसानों को बेहतर मुआवजा, आम नागरिकों को सही मूल्यांकन और राज्य को मजबूत निवेश माहौल देने वाला यह सुधार आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

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