भारत के डिजिटल पेमेंट सेक्टर में एक और बड़ा कदम देखने को मिल रहा है। देश की अग्रणी फिनटेक कंपनी PhonePe ने अपने प्रस्तावित आईपीओ के लिए अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (UDRHP) दाखिल कर दिया है। मार्केट रेगुलेटर Securities and Exchange Board of India (SEBI) से कंपनी को शेयर बाजार में लिस्टिंग की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसके साथ ही PhonePe का करीब ₹12,000 करोड़ का आईपीओ अब औपचारिक रूप से अगले चरण में पहुंच गया है।
यह आईपीओ पूरी तरह से ‘ऑफर फॉर सेल’ होगा, यानी कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी नहीं जुटाएगी। इसके बजाय मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाजार से बाहर निकलेंगे या हिस्सेदारी घटाएंगे। इस रणनीति से साफ संकेत मिलता है कि कंपनी फिलहाल विस्तार के लिए नई इक्विटी जुटाने की बजाय निवेशकों को लिक्विडिटी देने पर फोकस कर रही है।
PhonePe में सबसे बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली अमेरिकी रिटेल दिग्गज Walmart इस आईपीओ के जरिए अपनी करीब 9.06% हिस्सेदारी बेचने जा रही है। यह बिक्री लगभग 4.59 करोड़ शेयरों के बराबर होगी। फिलहाल PhonePe में वॉलमार्ट की हिस्सेदारी करीब 71.77% है, जो इस इश्यू के बाद घटेगी, हालांकि कंट्रोल अभी भी उसी के पास रहने की संभावना है।
इस आईपीओ की सबसे अहम बात यह है कि दो बड़े ग्लोबल निवेशक कंपनी से पूरी तरह बाहर निकलने जा रहे हैं। टेक दिग्गज Microsoft और इन्वेस्टमेंट फर्म Tiger Global इस इश्यू के जरिए अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देंगी। दोनों मिलकर करीब 47 लाख शेयर ऑफलोड करेंगे, जिसके बाद PhonePe के कैप टेबल से इनकी पूरी तरह एग्जिट हो जाएगी।
बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक, PhonePe इस आईपीओ में करीब 15 बिलियन डॉलर यानी लगभग 1.37 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन का लक्ष्य रख रही है। अगर यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह पेटीएम के बाद भारतीय फिनटेक सेक्टर का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ होगा। गौरतलब है कि कंपनी ने पिछले साल सितंबर में कॉन्फिडेंशियल रूट के जरिए सेबी के पास ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट्स जमा किए थे, जिन्हें अब मंजूरी मिल चुकी है।
सेबी की हरी झंडी के बाद अगला कदम रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के पास रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) फाइल करना होगा। माना जा रहा है कि सभी प्रक्रियाएं तय समय पर पूरी रहीं, तो PhonePe 2026 के मध्य तक शेयर बाजार में लिस्ट हो सकती है। इस मेगा आईपीओ के लिए कोटक महिंद्रा कैपिटल, सिटी बैंक, मॉर्गन स्टेनली और जेपी मॉर्गन जैसे दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंक सलाहकार की भूमिका निभा रहे हैं।
आईपीओ से पहले कंपनी की फाइनेंशियल तस्वीर में भी सुधार नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2024–25 में PhonePe का रेवेन्यू 41% की मजबूत बढ़त के साथ ₹7,148.6 करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल ₹5,064.1 करोड़ था। इसी दौरान कंपनी का घाटा घटकर ₹1,720 करोड़ रह गया है। खास बात यह है कि ESOP खर्चों को हटाकर कंपनी का एडजस्टेड प्रॉफिट पांच गुना बढ़कर करीब ₹630 करोड़ तक पहुंच चुका है, जिसे निवेशक एक पॉजिटिव संकेत के तौर पर देख रहे हैं।
डिजिटल पेमेंट मार्केट में PhonePe की पकड़ लगातार मजबूत बनी हुई है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के मुताबिक, UPI ट्रांजैक्शन में कंपनी की हिस्सेदारी करीब 45% है, जो उसे इस सेगमेंट में निर्विवाद लीडर बनाती है। प्लेटफॉर्म पर 60 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स हैं और करीब 5 करोड़ व्यापारी इसकी सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। हर महीने PhonePe के जरिए लगभग 1000 करोड़ ट्रांजैक्शन प्रोसेस होते हैं।
कुल मिलाकर, PhonePe का यह आईपीओ न सिर्फ कंपनी के निवेशकों के लिए, बल्कि पूरे भारतीय फिनटेक सेक्टर के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। वॉलमार्ट की आंशिक हिस्सेदारी बिक्री, माइक्रोसॉफ्ट और टाइगर ग्लोबल की एग्जिट, बेहतर होती फाइनेंशियल सेहत और UPI बाजार में मजबूत पकड़—ये सभी फैक्टर इस इश्यू को बाजार के सबसे ज्यादा चर्चित आईपीओ में शामिल कर सकते हैं।