झारखंड के Saranda Forest से गुरुवार सुबह एक बड़ी और निर्णायक सुरक्षा कार्रवाई की खबर सामने आई है। West Singhbhum जिले के छोटानागरा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुंभडीह गांव के आसपास सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। शुरुआती जानकारी के अनुसार इस ऑपरेशन में 10 से 12 माओवादियों के मारे जाने की खबर है, हालांकि अंतिम और आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि अभियान पूरा होने के बाद ही की जाएगी।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई खुफिया एजेंसियों से मिले पुख्ता इनपुट के बाद की गई। सूचना थी कि सारंडा के घने जंगलों में माओवादी किसी बड़ी वारदात की योजना बना रहे हैं। इसी आधार पर झारखंड पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त रूप से घेराबंदी अभियान शुरू किया। गुरुवार तड़के जैसे ही सुरक्षाबल इलाके में आगे बढ़े, जंगल में छिपे माओवादियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने मोर्चा संभालते हुए पूरे क्षेत्र को घेर लिया और मुठभेड़ तेज हो गई।
इस दौरान सुरक्षाबलों का सामना प्रतिबंधित CPI (Maoist) संगठन के कुख्यात ‘अनल दस्ते’ से हुआ। मुठभेड़ में संगठन के शीर्ष नेता अनल के मारे जाने की सूचना है। अनल पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और वह लंबे समय से देश के मोस्ट वांटेड माओवादियों में शामिल था। सुरक्षाबलों के लिए यह बड़ी रणनीतिक सफलता मानी जा रही है, क्योंकि अनल संगठन की सैन्य और रणनीतिक गतिविधियों का अहम चेहरा था।
सूत्रों के मुताबिक, माओवादी कमांडर अनल कई नामों से जाना जाता था और झारखंड, बिहार समेत आसपास के इलाकों में नक्सली नेटवर्क को मजबूत करने में उसकी बड़ी भूमिका रही है। वह कई बड़े हमलों की साजिश रचने और संगठन के कैडर को प्रशिक्षित करने में शामिल रहा था। उसकी मौत को माओवादी संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मुठभेड़ के बाद भी ऑपरेशन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सुरक्षाबलों ने पूरे सारंडा क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। घने और दुर्गम जंगलों के कारण अभियान को बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दिया जा रहा है। अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी माओवादी को भागने का मौका न मिले।
कोल्हान प्रमंडल के डीआईजी Anurjan Kispotta ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि अभियान अभी जारी है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन समाप्त होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। फिलहाल पूरे सारंडा इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
कुल मिलाकर, सारंडा के जंगलों में हुई यह कार्रवाई झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम में एक बड़ा मोड़ मानी जा रही है, जहां सुरक्षाबलों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि माओवाद के खिलाफ कार्रवाई में कोई ढील नहीं बरती जाएगी।