भारतीय खेल जगत में एक युग को सलाम करते हुए Sachin Tendulkar ने Saina Nehwal के करियर को खुले दिल से सराहा है। साइना ने हाल ही में यह साफ कर दिया कि वह अब प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में वापसी नहीं करेंगी, और इसी के साथ उनके शानदार सफर पर श्रद्धांजलि का सिलसिला शुरू हो गया। सचिन ने अपने संदेश में कहा कि साइना ने दुनिया को दिखाया कि भारतीय खिलाड़ी वैश्विक मंच पर खेल की दिशा बदल सकते हैं।
सचिन तेंदुलकर ने एक्स पर लिखे अपने भावुक संदेश में साइना की मेहनत, धैर्य और निरंतरता को उनकी सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि महानता किसी एक दिन में नहीं बनती, बल्कि लंबे समय तक किए गए अनुशासित प्रयासों से हासिल होती है। उनके मुताबिक, साइना ने भारतीय बैडमिंटन को विश्व पटल पर स्थापित किया और यह भरोसा जगाया कि सही तैयारी और आत्मविश्वास के साथ असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। पदकों से आगे बढ़कर उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने देशभर के युवाओं को सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस दिया।
रिटायरमेंट के फैसले पर खुद साइना ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा कि शरीर अब पहले जैसा साथ नहीं दे रहा था। लगातार चोटों और खासकर घुटने की समस्या के चलते वह उस स्तर की ट्रेनिंग नहीं कर पा रही थीं, जो शीर्ष पर बने रहने के लिए जरूरी होती है। उन्होंने स्वीकार किया कि विश्व नंबर वन बनने के लिए रोज़ आठ–नौ घंटे की कड़ी मेहनत चाहिए, लेकिन उनका घुटना एक–दो घंटे में ही सूज जाता था। ऐसे में उन्होंने महसूस किया कि यह सफर यहीं थामना ही बेहतर है।
साइना आखिरी बार 2023 सिंगापुर ओपन में कोर्ट पर दिखीं थीं। इसके बाद किसी बड़े टूर्नामेंट में उनकी वापसी नहीं हुई और वह पेरिस ओलंपिक भी नहीं खेल सकीं। इसके बावजूद, ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनने से लेकर लंबे समय तक विश्व रैंकिंग में शीर्ष पर रहने तक, उनका योगदान भारतीय खेल इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगा। सचिन का यह संदेश उसी विरासत की पुष्टि करता है—कि साइना नेहवाल सिर्फ एक चैंपियन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा हैं, जिनकी रोशनी लंबे समय तक भारतीय बैडमिंटन का रास्ता दिखाती रहेगी।