YouTube का बड़ा AI प्लान: 2026 में बदलेगा वीडियो देखने का अनुभव, ‘AI स्लॉप’ पर लगेगी लगाम

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दुनिया के सबसे बड़े वीडियो प्लेटफॉर्म YouTube ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर 2026 के लिए बड़ा और साफ रोडमैप तैयार कर लिया है। कंपनी के सीईओ Neal Mohan ने स्पष्ट कर दिया है कि यूट्यूब अब एआई से बने घटिया और भ्रामक कंटेंट, जिसे वह “AI स्लॉप” कहता है, के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रहा है। उनका कहना है कि एआई को इंसानी क्रिएटिविटी के विकल्प के तौर पर नहीं, बल्कि एक ताकतवर सहायक टूल के रूप में देखा जाना चाहिए।

नील मोहन के मुताबिक, एआई कोई नई चीज नहीं है। यह सालों से यूट्यूब के रिकमेंडेशन सिस्टम, कंटेंट मॉडरेशन और प्लेटफॉर्म को स्केल करने में अहम भूमिका निभाता रहा है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब एआई सीधे तौर पर क्रिएशन प्रोसेस का हिस्सा बन रहा है। उन्होंने एआई की तुलना फोटोशॉप, CGI और सिंथेसाइज़र जैसी तकनीकों से करते हुए कहा कि जैसे इन टूल्स ने क्रिएटर्स की आज़ादी बढ़ाई, वैसे ही एआई भी रचनात्मक सीमाओं को आगे ले जाएगा, न कि नौकरियां छीन लेगा। इसी का संकेत है कि दिसंबर में हर दिन 10 लाख से ज्यादा चैनल यूट्यूब के एआई टूल्स का इस्तेमाल कर रहे थे।

हालांकि, बढ़ती ताकत के साथ खतरे भी बढ़े हैं। डीपफेक और फर्जी वीडियो को लेकर यूट्यूब अब जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने जा रहा है। कंपनी ने साफ किया है कि एआई से बने वीडियो पर लेबल लगाना अनिवार्य होगा। अगर कोई क्रिएटर एआई का गलत इस्तेमाल कर किसी की आवाज, चेहरा या पहचान से छेड़छाड़ करता है, तो ऐसा कंटेंट तुरंत हटाया जाएगा। इसके साथ ही, क्रिएटर्स को अपनी पहचान पर पूरा नियंत्रण देने के लिए ‘कंटेंट आईडी’ सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है।

सबसे बड़ी चिंता “AI स्लॉप” यानी मशीनों द्वारा थोक में बनाए जा रहे कमजोर, क्लिकबेट और स्पैम जैसे वीडियो हैं। यूट्यूब का कहना है कि वह क्रिएटिव फ्रीडम को तो बढ़ावा देगा, लेकिन दर्शकों के समय की कीमत पर नहीं। 2026 तक प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम इतने स्मार्ट हो जाएंगे कि वे बेकार एआई कंटेंट को खुद पहचानकर उसे दर्शकों की स्क्रीन से दूर रख सकें।

दर्शकों के अनुभव में भी बड़ा बदलाव दिखने वाला है। यूट्यूब का ‘Ask’ टूल पहले ही करोड़ों यूजर्स इस्तेमाल कर चुके हैं, जिससे वे वीडियो से जुड़ी जानकारी तुरंत पा रहे हैं। वहीं, ऑटो-डबिंग फीचर की वजह से कंटेंट भाषाओं की दीवार तोड़ रहा है और लाखों लोग रोज़ाना अलग-अलग भाषाओं में वीडियो देख पा रहे हैं। नील मोहन का मानना है कि आने वाले 5 से 10 सालों में सबसे बड़ा क्रिएटर शायद कोई ऐसा होगा, जिसे आज कोई नहीं जानता—और यूट्यूब का एआई प्लान उसी भविष्य की नींव रख रहा है।

कुल मिलाकर, 2026 तक यूट्यूब सिर्फ वीडियो प्लेटफॉर्म नहीं रहेगा, बल्कि एक ऐसा स्मार्ट इकोसिस्टम बनेगा जहां क्वालिटी, भरोसे और क्रिएटिविटी को एआई के सहारे नई ऊंचाई मिलेगी, और “कचरा कंटेंट” के लिए जगह लगातार कम होती जाएगी।

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