ऑस्कर में फिर खाली हाथ भारत: ‘होमबाउंड’ नॉमिनेशन से बाहर, 25 साल बाद भी इंतज़ार कायम

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ऑस्कर 2026 के नॉमिनेशन्स की घोषणा के साथ ही भारतीय सिनेमा को एक बार फिर निराशा का सामना करना पड़ा है। 98वें एकेडमी अवॉर्ड्स में भारत की आधिकारिक एंट्री रही फिल्म Homebound को बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म कैटेगरी में अंतिम नॉमिनेशन नहीं मिल सका। 22 जनवरी 2026 को घोषित नॉमिनेशन्स में जब भारत का नाम नहीं पुकारा गया, तो यह साफ हो गया कि इस श्रेणी में देश का लंबा इंतज़ार अभी और खिंचेगा। ऑस्कर समारोह 15 मार्च 2026 को आयोजित होगा, लेकिन उससे पहले ही भारत का सपना टूट चुका है।

‘होमबाउंड’ के बाहर होने के साथ ही एक बार फिर उस ऐतिहासिक तथ्य की याद ताजा हो गई कि भारत को इस कैटेगरी में आखिरी नॉमिनेशन 2001 में मिला था। तब आमिर खान की Lagaan ने ऑस्कर तक का सफर तय किया था और वह भारतीय सिनेमा के सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय अभियानों में शामिल हो गई थी। इसके बाद बीते ढाई दशक में कई दमदार फिल्में गईं, सराही गईं, शॉर्टलिस्ट भी हुईं, लेकिन अंतिम पांच तक पहुंचने का सपना अधूरा ही रहा।

इस बार भी उम्मीदें कम नहीं थीं। ‘होमबाउंड’ ने ऑस्कर की 15 फिल्मों की शॉर्टलिस्ट में जगह बनाई थी, जिसने यह संकेत दिया था कि फिल्म की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता मजबूत है। लेकिन फाइनल नॉमिनेशन की सूची में ब्राजील, फ्रांस, नॉर्वे, स्पेन और ट्यूनीशिया की फिल्मों ने जगह बना ली और भारत बाहर रह गया। यह झटका इसलिए भी ज्यादा महसूस हुआ, क्योंकि फिल्म पहले ही कई बड़े मंचों पर अपनी छाप छोड़ चुकी थी।

धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी ‘होमबाउंड’ का निर्देशन नीरज घेवान ने किया था और इसे करण जौहर, अपूर्वा मेहता व अदर पूनावाला ने प्रोड्यूस किया। फिल्म पत्रकार बशारत पीर के 2020 के न्यूयॉर्क टाइम्स लेख से प्रेरित है और दो दोस्तों—शोएब और चंदन—की कहानी कहती है, जो कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान अपनी आजीविका खो देते हैं और घर लौटने की जद्दोजहद में सामाजिक असमानता, व्यवस्थागत भेदभाव और आर्थिक संकट से जूझते हैं। विशाल जेठवा, ईशान खट्टर और जान्हवी कपूर की अदाकारी को भी खूब सराहना मिली।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिल्म का सफर प्रभावशाली रहा। 2025 में कान फिल्म फेस्टिवल के ‘अन सर्टेन रिगार्ड’ सेक्शन में इसका प्रीमियर हुआ, जहां इसे आलोचकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में यह इंटरनेशनल ऑडियंस चॉइस अवॉर्ड के लिए सेकंड रनर-अप भी रही। इन उपलब्धियों ने फिल्म को वैश्विक पहचान दिलाई, लेकिन ऑस्कर का आखिरी दरवाज़ा फिर बंद रह गया।

कुल मिलाकर, ‘होमबाउंड’ का नॉमिनेशन से चूकना भारतीय सिनेमा के लिए एक और निराशाजनक अध्याय है। फिर भी, फिल्म की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी और मिली सराहना यह साबित करती है कि भारतीय कहानियां दुनिया तक पहुंच रही हैं—बस ऑस्कर की मुहर लगने का इंतज़ार अब भी बाकी है।

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