रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होते ही प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वर्ष 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजिव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे आईजी बिलासपुर रेंज के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। कमिश्नरी सिस्टम के साथ ही पुलिस विभाग में व्यापक स्तर पर तबादले किए गए हैं, जिससे साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार रायपुर की पुलिसिंग को नए सांचे में ढालना चाहती है।
इस फेरबदल में श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण की पुलिस अधीक्षक बनाया गया है, जबकि कांकेर में पदस्थ अमित तुकाराम कांबले को रायपुर नगरीय में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं रायपुर के एसएसपी रहे डॉ. लाल उमेद सिंह को जशपुर भेज दिया गया है। जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ स्थानांतरित किया गया है। इसी आदेश के तहत रामगोपाल गर्ग को दुर्ग रेंज से हटाकर बिलासपुर रेंज का आईजी बनाया गया है, जबकि अभिषेक शांडिल्य को राजनांदगांव रेंज से दुर्ग रेंज आईजी की जिम्मेदारी दी गई है। बालाजी राव सोमावर, जो अब तक पुलिस मुख्यालय रायपुर में कानून व्यवस्था संभाल रहे थे, उन्हें राजनांदगांव रेंज का आईजी नियुक्त किया गया है। इन बड़े नामों के साथ कुल मिलाकर 15 आईपीएस और 24 अन्य पुलिस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, जिससे पूरे प्रदेश की पुलिसिंग संरचना में हलचल मच गई है।
कमिश्नरी व्यवस्था के तहत रायपुर में डीसीपी स्तर पर भी अहम नियुक्तियां की गई हैं। वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारियों को अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि शहरी पुलिसिंग को ज्यादा मजबूत और त्वरित बनाया जा सके। ट्रैफिक, प्रोटोकॉल, क्राइम और साइबर जैसे संवेदनशील विभागों के लिए अलग-अलग पुलिस उपायुक्त तैनात किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि कमिश्नरी सिस्टम के जरिए अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर सीधा और केंद्रीकृत नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।
23 जनवरी 2026 से रायपुर जिले के आधे हिस्से में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम प्रभावी हो गया है। जिले के 21 थाने कमिश्नर के अधीन रहेंगे, जबकि 12 थाने एसपी के नियंत्रण में रहेंगे। गृह विभाग ने इसे लेकर पहले ही नोटिफिकेशन जारी कर दिया था। इस फैसले के साथ रायपुर पुलिस फोर्स को दो हिस्सों में बांट दिया गया है, जो भोपाल और इंदौर मॉडल की तर्ज पर किया गया प्रयोग माना जा रहा है।
हालांकि इस व्यवस्था को लेकर अंदरखाने विरोध भी कम नहीं है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि कमिश्नरी सिस्टम पूरे जिले में लागू होगा। खुद गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने रखा था, लेकिन कैबिनेट स्तर पर चर्चा के दौरान आईएएस लॉबी के विरोध के चलते पूरे जिले में इसे लागू करने का फैसला टल गया। बाद में आंशिक रूप से कमिश्नरी सिस्टम लागू करने पर सहमति बनी।
आईपीएस लॉबी के भीतर इस फैसले को लेकर असंतोष भी सामने आया है। अधिकारियों का कहना है कि अधूरे कमिश्नरी सिस्टम के चलते जिले में दो अलग-अलग पुलिस स्ट्रक्चर बनाने होंगे, जबकि न तो पर्याप्त मैनपावर है और न ही संसाधन। इससे फील्ड में पुलिस बल की कमी और दफ्तरों में स्टाफ की भीड़ बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। सीमाओं के बंटवारे को भी मनमाना बताया जा रहा है, जहां ग्रामीण इलाकों को कमिश्नरी क्षेत्र में शामिल कर दिया गया, जबकि कुछ थानों को ग्रामीण सेटअप में शिफ्ट कर दिया गया।
एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने भी पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की सिफारिश की थी, लेकिन उस रिपोर्ट पर अब तक न तो कोई गंभीर चर्चा हुई और न ही कमेटी को बुलाकर स्पष्टीकरण लिया गया। इसी बीच आंकड़े यह भी बताते हैं कि रायपुर में एक थाने के लिए जहां कम से कम 75 पुलिसकर्मियों की जरूरत है, वहां औसतन 30 से 35 का ही बल मौजूद है। ऐसे में कमिश्नरी और एसपी सिस्टम के बीच बंटवारे से जमीनी पुलिसिंग पर दबाव बढ़ना तय माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम की शुरुआत एक बड़े प्रशासनिक प्रयोग के तौर पर देखी जा रही है। संजीव शुक्ला की नियुक्ति से यह व्यवस्था अब किस दिशा में आगे बढ़ेगी और क्या यह वाकई पुलिसिंग को मजबूत करेगी या सिर्फ एक औपचारिक बदलाव बनकर रह जाएगी—इसका जवाब आने वाले महीनों में ही सामने आएगा।