रायपुर। छत्तीसगढ़ में रेत, पत्थर और अन्य खनिजों के अवैध उत्खनन पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार एक नई और तकनीक-आधारित योजना लागू करने जा रही है। इस प्लान के तहत दिन-रात ड्रोन कैमरों से खदानों की निगरानी होगी। कहीं से भी शिकायत या पुख्ता सूचना मिलते ही ड्रोन के जरिए मौके का निरीक्षण किया जाएगा और लाइव फुटेज के आधार पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस पहल को अमल में लाने के लिए Chhattisgarh Mineral Development Corporation द्वारा Directorate General of Civil Aviation के अधीन काम करने वाली एजेंसियों से अनुबंध किया जाएगा। यही एजेंसियां ड्रोन ऑपरेशन, निगरानी और रिपोर्टिंग का काम संभालेंगी। जैसे ही किसी खदान में अवैध उत्खनन का संकेत मिलेगा, उसकी सूचना सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी, जिसके बाद खनिज विभाग की टीम तुरंत मौके के लिए रवाना होगी।
प्रदेश के कई जिलों में अवैध खनन की गतिविधियां खासतौर पर रात के समय ज्यादा होती हैं। अब तक की कार्रवाई में अक्सर मशीनें और वाहन तो पकड़े जाते हैं, लेकिन उत्खनन कराने वाले लोग टीम पहुंचने से पहले फरार हो जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए ड्रोन-आधारित निगरानी को हथियार बनाया जा रहा है, ताकि साक्ष्य के साथ त्वरित कार्रवाई हो और माफिया को दोबारा सक्रिय होने का मौका न मिले।
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल के अनुसार, ड्रोन कैमरों से खदानों की निरंतर निगरानी कर अवैध उत्खनन और उसे कराने वालों पर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए DGCA-मान्यता प्राप्त एजेंसियों के साथ औपचारिक करार होगा, ताकि संचालन नियमों के दायरे में और सुरक्षित तरीके से हो।
इस योजना का तकनीकी केंद्र Naya Raipur में स्थापित किया जाएगा, जहां एक समर्पित कंट्रोल रूम बनेगा। यहां ड्रोन से आने वाली लाइव लोकेशन और फुटेज की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। कंट्रोल रूम Chhattisgarh Mineral Development Corporation और खनिज विभाग के अधीन काम करेगा, जिससे सूचना मिलते ही फील्ड टीम एक्टिव हो सके।
ड्रोन सेवाओं के लिए DGCA के अंतर्गत संचालित एजेंसियों से अनुबंध करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और आगामी 10–15 दिनों में निविदा जारी होने की संभावना है। शुरुआती चरण में उन जिलों पर फोकस किया जाएगा, जहां रेत और पत्थर की खदानें सबसे अधिक हैं। आवश्यक ड्रोन की संख्या और तैनाती का खाका निविदा प्रक्रिया के बाद तय किया जाएगा।
कुल मिलाकर, ड्रोन-आधारित 24×7 निगरानी और नवा रायपुर के कंट्रोल रूम से संचालित त्वरित कार्रवाई मॉडल अवैध खनन के खिलाफ राज्य की अब तक की सबसे सख्त और तकनीकी पहल मानी जा रही है, जिससे माफिया नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार की उम्मीद की जा रही है।