भारत में स्लीप एपनिया एक तेजी से बढ़ती लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली गंभीर बीमारी बन चुकी है। All India Institute of Medical Sciences के मुताबिक, साल 2023 तक देश में करीब 10.4 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) से पीड़ित थे और मौजूदा हालात को देखते हुए यह संख्या अब और बढ़ चुकी होने की आशंका है। आमतौर पर लोग इसे सिर्फ खर्राटों की समस्या मानकर टाल देते हैं, लेकिन असल में यह बीमारी धीरे-धीरे दिल, दिमाग, मेटाबॉलिज्म और ओवरऑल हेल्थ पर गंभीर असर डालती है।
अब तक स्लीप एपनिया के इलाज के लिए कोई डेडिकेटेड दवा मौजूद नहीं थी। मरीजों को लाइफस्टाइल में बदलाव, वजन कम करने, सोने की पोजीशन सुधारने और खासतौर पर CPAP मशीन जैसी डिवाइस पर निर्भर रहना पड़ता था। हालांकि, अमेरिका से आई एक नई मेडिकल अपडेट ने इस दिशा में बड़ी उम्मीद जगा दी है। वहां वैज्ञानिकों ने एक ओरल पिल विकसित की है, जो स्लीप एपनिया के इलाज के लिए बनाई गई है और फिलहाल थर्ड फेज क्लिनिकल ट्रायल पूरा कर चुकी है। यह दवा अब U.S. Food and Drug Administration की मंजूरी का इंतजार कर रही है।
यह संभावित दवा रात में सोने से पहले ली जाने वाली एक टैबलेट है, जिसे खासतौर पर ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के लिए डिजाइन किया गया है। इसका काम नींद के दौरान गले की मांसपेशियों को एक्टिव बनाए रखना है, ताकि सांस की नली ढीली पड़कर बंद न हो। आसान शब्दों में कहें तो यह दवा शरीर के उस नेचुरल मैकेनिज्म को मजबूत करती है, जो एयरवे को खुला रखता है। इससे नींद के दौरान सांस रुकने की घटनाएं कम होती हैं और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहती है।
डॉक्टर्स के मुताबिक, यह दवा स्लीप एपनिया की गंभीरता को कम करने में काफी कारगर साबित हो सकती है। फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में यह देखा गया कि दवा के इस्तेमाल से स्लीप एपनिया की गंभीरता में करीब 47 प्रतिशत तक कमी आई है। मेडिकल साइंस की नजर में यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि अब तक इस बीमारी के लिए कोई सीधी दवा मौजूद नहीं थी।
मेडिकल एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह पिल खासकर उन मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकती है, जो CPAP मशीन को नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं कर पाते। CPAP मशीन आज भी एक प्रभावी इलाज है, लेकिन मास्क और मशीन की असुविधा के कारण कई मरीज इसे लंबे समय तक फॉलो नहीं कर पाते। ऐसे में यह दवा इलाज का एक आसान और व्यवहारिक विकल्प बन सकती है। हालांकि डॉक्टर फिलहाल इसे मशीन का पूर्ण विकल्प नहीं, बल्कि एक नया और पूरक इलाज मान रहे हैं।
साइड इफेक्ट्स की बात करें तो अब तक के ट्रायल में कोई गंभीर खतरा सामने नहीं आया है। कुछ मरीजों में मुंह सूखने या नींद के पैटर्न में हल्की गड़बड़ी जैसी मामूली समस्याएं देखी गई हैं, लेकिन कोई बड़ा या जानलेवा साइड इफेक्ट रिपोर्ट नहीं हुआ है। फिर भी, FDA की मंजूरी और लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर साफ होगी।
भारत में इस दवा की उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई पक्की तारीख तय नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पहले अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों में मंजूरी मिलने के बाद ही यह भारत में आ सकेगी। अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो यह दवा 2027 की शुरुआत तक मार्केट में दस्तक दे सकती है।
अगर स्लीप एपनिया का समय पर इलाज न किया जाए, तो यह हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, डायबिटीज और ब्रेन से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। ऐसे में यह नई दवा उन करोड़ों मरीजों के लिए एक बड़ी राहत बन सकती है, जो अब तक मशीनों और अधूरे इलाज पर निर्भर थे। फिलहाल मरीजों को थोड़ा इंतजार जरूर करना पड़ेगा, लेकिन उम्मीद की यह किरण स्लीप एपनिया के इलाज में एक नए दौर की शुरुआत कर सकती है।