आयुष्मान का 600 करोड़ बकाया: निजी अस्पतालों का अल्टीमेटम, इलाज ठप होने की चेतावनी

Spread the love

रायपुर में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना को लेकर बड़ा संकट खड़ा होता दिख रहा है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य एवं शहीद वीरनारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत निजी अस्पतालों का करीब 600 करोड़ रुपये का भुगतान पिछले पांच महीनों से अटका हुआ है। इस लंबित राशि ने निजी अस्पतालों की कमर तोड़ दी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन ने साफ चेतावनी दी है—अगर 10 दिनों के भीतर भुगतान नहीं हुआ, तो आयुष्मान योजना के तहत इलाज बंद करने जैसे कठोर फैसले लिए जा सकते हैं।

निजी अस्पतालों का कहना है कि लगातार भुगतान न मिलने से खासकर छोटे और मंझोले अस्पतालों का संचालन बेहद मुश्किल हो गया है। दवाइयों की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, मशीनों का रखरखाव और रोजमर्रा के खर्च अब बोझ बनते जा रहे हैं। ऊपर से बायोमेडिकल वेस्ट के नाम पर वसूले जा रहे भारी यूजर चार्ज ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है। डॉक्टरों का आरोप है कि यह वसूली अस्पतालों की वास्तविक क्षमता और आकार के हिसाब से नहीं, बल्कि मनमाने तरीके से की जा रही है।

इन्हीं मुद्दों को लेकर राज्य में निजी अस्पतालों की समस्याओं पर हाल ही में Indian Medical Association और Association of Healthcare Providers of India की अलग-अलग बैठकें हुईं, जहां माहौल काफी गर्म रहा। बैठकों में साफ तौर पर कहा गया कि आयुष्मान योजना की भुगतान प्रक्रिया आज भी जटिल और अव्यवहारिक बनी हुई है। बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद न तो भुगतान समय पर हो रहा है और न ही प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।

एक और बड़ा मुद्दा है इलाज के पैकेज रेट। प्रदेश में निजी अस्पतालों को आज भी वर्ष 2018 में तय की गई दरों पर भुगतान किया जा रहा है। बीते आठ सालों में दवाइयों, मेडिकल उपकरणों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी हो चुकी है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन आयुष्मान योजना के पैकेज में अब तक कोई ठोस संशोधन नहीं किया गया। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मौजूदा दरों पर गुणवत्तापूर्ण इलाज देना अब संभव नहीं रह गया है।

निजी अस्पतालों का यह भी तर्क है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ेगा। इलाज रुकने या सीमित होने की स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और जरूरतमंद लोगों को होगा, जिनके लिए आयुष्मान योजना जीवनरेखा मानी जाती है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है कि वह इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेती है और कब तक 600 करोड़ के बकाए पर कोई ठोस फैसला सामने आता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *