दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp की प्राइवेसी एक बार फिर कठघरे में है। इसकी पेरेंट कंपनी Meta Platforms के खिलाफ अमेरिका के United States Federal Court में दायर एक नए मुकदमे ने एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन (E2E) के दावों पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। मुकदमे में आरोप है कि जिन निजी चैट्स को कंपनी पूरी तरह सुरक्षित बताती है, उन तक भी मेटा की पहुंच हो सकती है।
ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के यूजर्स के एक समूह ने यह क्लास-एक्शन मुकदमा दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि मेटा और वॉट्सएप अरबों यूजर्स को यह विश्वास दिलाते रहे हैं कि उनकी निजी बातचीत कोई तीसरा नहीं देख सकता, जबकि वास्तविकता इससे अलग हो सकती है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कंपनी के पास यूजर्स की लगभग सभी प्राइवेट बातचीत को स्टोर करने, विश्लेषण करने और जरूरत पड़ने पर एक्सेस करने की तकनीकी क्षमता मौजूद है।
मुकदमे में यह भी कहा गया है कि “सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही मैसेज पढ़ सकता है” वाला दावा भ्रामक है। कुछ कथित व्हिसलब्लोअर्स के हवाले से यह आरोप लगाया गया है कि विशेष परिस्थितियों में मेटा के कर्मचारी यूजर्स के डेटा तक पहुंच बना सकते हैं। यदि अदालत इस मामले को क्लास-एक्शन का दर्जा देती है, तो दुनिया भर के करोड़ों यूजर्स इसके दायरे में आ सकते हैं और कंपनी पर भारी जुर्माना भी लग सकता है।
इन आरोपों पर मेटा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी के प्रवक्ता एंडी स्टोन ने दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कहा कि यह कहना कि वॉट्सएप मैसेज एन्क्रिप्टेड नहीं हैं, सरासर गलत और हास्यास्पद है। उनका कहना है कि वॉट्सएप एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है, जिसे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा का मानक माना जाता है। मेटा ने मुकदमे को “काल्पनिक कहानी” करार देते हुए याचिकाकर्ताओं के वकीलों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही है।
एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का मतलब यह बताया जाता है कि भेजा गया मैसेज एक गुप्त कोड में बदल जाता है, जिसे केवल रिसीवर का डिवाइस ही खोल सकता है। कंपनी का दावा रहा है कि इस प्रक्रिया में न वॉट्सएप और न ही मेटा संदेशों को पढ़ सकता है। लेकिन ताज़ा मुकदमे ने इसी भरोसे की नींव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि मेटा का प्राइवेसी रिकॉर्ड पहले भी विवादों में रहा है। 2020 में सामने आए कैम्ब्रिज एनालिटिका मामले के बाद कंपनी को 5 बिलियन डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा था। बाद के वर्षों में भी यूजर डेटा की सुरक्षा को लेकर समय-समय पर आरोप लगते रहे हैं। अब यह नया मुकदमा तय करेगा कि वॉट्सएप का E2E एन्क्रिप्शन वाकई अभेद्य है या सिर्फ भरोसे का खेल।