भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील के अटकने की वजह को लेकर अब अमेरिकी राजनीति के भीतर से ही बड़े खुलासे सामने आए हैं। अमेरिका के रिपब्लिकन सीनेटर Ted Cruz की एक लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग में दावा किया गया है कि इस डील में सबसे बड़ी अड़चन अमेरिका के उपराष्ट्रपति J. D. Vance की वजह से आई। रिकॉर्डिंग में सीनेटर ने यह भी कहा कि कई मौकों पर खुद राष्ट्रपति Donald Trump के फैसलों ने भी बातचीत को आगे बढ़ने से रोका।
यह ऑडियो अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios के हाथ लगी है। बताया जा रहा है कि यह बातचीत 2025 के मध्य में दानदाताओं के साथ बंद कमरे में हुई बैठकों के दौरान रिकॉर्ड की गई थी। इसमें क्रूज खुलकर कहते हैं कि भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर व्हाइट हाउस के भीतर ही गंभीर मतभेद थे।
जब दानदाताओं ने सवाल किया कि डील में सबसे ज्यादा रुकावट कौन डाल रहा है, तो क्रूज ने व्हाइट हाउस के ट्रेड एडवाइजर Peter Navarro, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कभी-कभी राष्ट्रपति ट्रम्प का नाम लिया। उनके मुताबिक, व्हाइट हाउस के भीतर ‘फ्री ट्रेड’ समर्थकों और ‘अमेरिका फर्स्ट’ सोच रखने वाले नेताओं के बीच खींचतान चल रही थी।
रिकॉर्डिंग में क्रूज ने यह भी खुलासा किया कि अप्रैल 2025 में लागू किए गए ट्रम्प प्रशासन के टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ के बाद उन्होंने और कुछ अन्य सीनेटरों ने राष्ट्रपति ट्रम्प से देर रात फोन पर लंबी बातचीत की और फैसले पर दोबारा सोचने की सलाह दी, लेकिन बात काफी तनावपूर्ण हो गई। क्रूज ने चेतावनी दी थी कि अगर नवंबर 2026 तक रिटायरमेंट अकाउंट्स में 30% तक गिरावट आई और किराना सामान की कीमतें 10–20% बढ़ीं, तो रिपब्लिकन पार्टी को चुनावों में भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
क्रूज के अनुसार उन्होंने ट्रम्प से साफ कहा था कि ऐसी स्थिति में पार्टी हाउस भी हारेगी, सीनेट भी और अगले दो साल महाभियोग की राजनीति से जूझने पड़ेंगे। जवाब में ट्रम्प कथित तौर पर बेहद नाराज़ हो गए और बातचीत वहीं बिगड़ गई।
इस लीक रिकॉर्डिंग ने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। क्रूज ने उपराष्ट्रपति वेंस पर तंज कसते हुए कहा कि वे कंजर्वेटिव कमेंटेटर Tucker Carlson के प्रभाव में हैं। यह मतभेद सिर्फ व्यापार नीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विदेश नीति और अहम नियुक्तियों तक फैले हुए बताए जा रहे हैं। हालांकि सार्वजनिक मंचों पर क्रूज और व्हाइट हाउस दोनों ही पार्टी एकता की बात कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बीच भारत–अमेरिका व्यापार संबंधों पर भी दबाव बढ़ा है। अमेरिका अब तक भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा चुका है, जिसमें 25% ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और 25% रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया दंडात्मक शुल्क शामिल है। अमेरिका का तर्क है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिलती है, जबकि भारत इस पेनाल्टी को पूरी तरह गलत बताते हुए हटाने की मांग करता रहा है।
भारत–अमेरिका ट्रेड डील को लेकर 2025 की शुरुआत से ही कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब इस लीक ऑडियो ने साफ कर दिया है कि यह डील सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि अमेरिकी आंतरिक राजनीति की भी शिकार हो गई।