नया साल सिर्फ कैलेंडर बदलने का नाम नहीं होता, यह अपनी निवेश सोच को नए सिरे से परखने का मौका भी देता है। बहुत से निवेशक सालों से एक ही SIP चला रहे हैं और मान लेते हैं कि जो अब तक काम करता आया है, वही आगे भी करेगा। लेकिन सवाल यही है—क्या वही SIP और वही एसेट एलोकेशन 2026 की बदली हुई परिस्थितियों के लिए तैयार है? बाजार स्थिर नहीं रहता और निवेश रणनीति भी पत्थर की लकीर नहीं हो सकती।
2026 का बाजार एक तूफानी समंदर जैसा दिख रहा है, जहां दिशा का अंदाजा लगाना आसान नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, ट्रंप टैरिफ, वैश्विक अनिश्चितता, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और व्यापार युद्ध की चर्चाएं माहौल को लगातार अस्थिर बनाए रखेंगी। ऐसे शोरगुल में रोज़-रोज़ फैसले बदलना निवेशकों को भटका सकता है। इसी वजह से म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिये निवेश आज भी सबसे अनुशासित और व्यावहारिक रास्ता बना हुआ है, जो बाजार के शोर से दूर आपको निवेश की पटरी पर बनाए रखता है।
लेकिन यहां भी एक बात साफ समझनी होगी—SIP अपने आप में जादू नहीं है। सही परिणाम तभी मिलते हैं जब SIP आपकी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप हो। उम्र बढ़ने के साथ रिस्क प्रोफाइल बदलती है, जिम्मेदारियां बढ़ती हैं और लक्ष्य भी बदल जाते हैं। ऐसे में वही पुरानी इक्विटी-हैवी रणनीति हर निवेशक के लिए सही नहीं रह जाती। कहीं पोर्टफोलियो में बैलेंस बढ़ाने की जरूरत होती है, तो कहीं जोखिम घटाने की।
साथ ही आदतें बदलना भी उतना ही जरूरी है जितना स्कीम बदलना। बाजार गिरने पर SIP रोक देना, या तेजी देखकर एकमुश्त ज्यादा पैसा डाल देना—ये दोनों ही आदतें लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती हैं। 2026 जैसे अनिश्चित साल में सबसे बड़ी ताकत धैर्य, अनुशासन और समय-समय पर रिव्यू है। रणनीति को जिंदा रखना होगा—ना कि जड़।
निष्कर्ष साफ है। नया साल तभी सही मायनों में नई शुरुआत बनेगा, जब निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सिर्फ जारी ही न रखें, बल्कि उसे बदलती परिस्थितियों के हिसाब से ढालें भी। बाजार चाहे जितना भी तूफानी क्यों न हो, सोच-समझकर बनाई गई SIP रणनीति आपको मंजिल की ओर लगातार आगे बढ़ाती रहती है।