Credit Score: 580 के आसपास अटका स्कोर कोई सजा नहीं, सही कदम उठे तो किस्मत बदल सकती है

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अगर आपका क्रेडिट स्कोर 580 के आसपास घूम रहा है, तो इसकी तकलीफ रोज़मर्रा की ज़िंदगी में साफ दिखती है। लोन की फाइल बार-बार अटकना, ब्याज दरें उम्मीद से ज्यादा होना और हर जगह फाइनेंशियल सवालों का सामना करना—ये सब इसी एक नंबर का असर होता है। अच्छी बात यह है कि क्रेडिट स्कोर कोई स्थायी ठप्पा नहीं है। यह आपकी आदतों और फैसलों का नतीजा होता है, और इन्हें बदला जाए तो स्कोर भी बदलता है। बुरी खबर बस इतनी है कि इसमें कोई जादुई शॉर्टकट नहीं होता। सुधार धीरे-धीरे आता है, लेकिन आता ज़रूर है।

सबसे पहले भुगतान की आदत को सुधारना जरूरी है। एक भी लेट पेमेंट क्रेडिट स्कोर को महीनों तक पीछे धकेल सकती है। रकम छोटी हो या बड़ी, समय पर भुगतान ही सबसे मजबूत आधार है। ऑटो-डेबिट लगाना, खाते में थोड़ा बैलेंस हमेशा रखना और पैसों की तंगी में भी कम से कम मिनिमम अमाउंट समय पर चुकाना—ये छोटी बातें स्कोर को दोबारा खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

दूसरा बड़ा मुद्दा क्रेडिट कार्ड का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल है। अगर हर महीने आपकी लिमिट का बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है, तो बैंक इसे फाइनेंशियल प्रेशर मानते हैं। यही वजह है कि स्कोर लंबे समय तक 500–600 के दायरे में फंसा रहता है। बैलेंस धीरे-धीरे कम करना शुरू करें। लिमिट पूरी भरने की बजाय थोड़ा खाली छोड़ना भी कुछ महीनों में असर दिखाने लगता है।

कम स्कोर के दौर में नया लोन या नया कार्ड अप्लाई करना अक्सर हालात और बिगाड़ देता है। हर नई इंक्वायरी स्कोर को नीचे खींचती है। बेहतर है कि कुछ समय के लिए सभी नए आवेदन रोक दिए जाएं और पूरा ध्यान मौजूदा खातों को सुधारने पर लगाया जाए। यह संयम आगे चलकर काम आता है।

अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि खराब स्कोर उनकी ही गलती है, जबकि कई बार क्रेडिट रिपोर्ट में ही गड़बड़ी होती है। बंद लोन का अभी भी एक्टिव दिखना, समय पर किए गए पेमेंट को लेट दिखा देना या कोई ऐसा अकाउंट जो आपका ही न हो—ये सब स्कोर को बेवजह नुकसान पहुंचाते हैं। रिपोर्ट ध्यान से जांचना और गलती मिलने पर शिकायत दर्ज करना जरूरी है, क्योंकि सही होते ही स्कोर में अचानक सुधार भी दिख सकता है।

एक आम गलती यह भी होती है कि लोग पुराने, अच्छे रिकॉर्ड वाले खाते बंद कर देते हैं। जबकि लंबी और साफ क्रेडिट हिस्ट्री स्कोर को सहारा देती है। ऐसे खाते पुराने नुकसान को बैलेंस करने में मदद करते हैं, इसलिए उन्हें बेवजह बंद करना समझदारी नहीं है।

580 से सीधे 800 तक पहुंचना रातों-रात नहीं होता। लेकिन अगर आदतें सही दिशा में बदल दी जाएं, तो 3 से 6 महीने में सुधार साफ नजर आने लगता है। पहले स्कोर ‘रिस्की’ कैटेगरी से बाहर आता है, उसके बाद आगे बढ़ना आसान हो जाता है। कम क्रेडिट स्कोर कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक संकेत है कि कहीं कुछ गलत हुआ। धैर्य रखिए, नई गलतियों से बचिए और सिस्टम को वक्त दीजिए—क्योंकि क्रेडिट स्कोर आखिरकार बोरिंग लेकिन भरोसेमंद व्यवहार को ही इनाम देता है।

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