चांदी असली है या नकली? खरीदने के बाद भी इन आसान तरीकों से करें शुद्धता की पक्की जांच

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आजकल चांदी के गहनों और सिक्कों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही मिलावटी चांदी का खतरा भी बढ़ गया है। कई बार लोग सिर्फ चमक और वजन देखकर चांदी खरीद लेते हैं, और बाद में पता चलता है कि वह पूरी तरह शुद्ध नहीं है। अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि खरीदी हुई चांदी असली है या नहीं, तो घबराने की जरूरत नहीं। कुछ आसान संकेत और घरेलू तरीके आपको सच्चाई तक पहुंचा सकते हैं।

सबसे भरोसेमंद पहचान हॉलमार्क से होती है। भारत में Bureau of Indian Standards (BIS) द्वारा प्रमाणित हॉलमार्क वाली चांदी ही सबसे सुरक्षित मानी जाती है। 925, 999 या 916 जैसे अंक चांदी की शुद्धता बताते हैं। खरीदते समय अगर यह निशान मौजूद है, तो मिलावट की संभावना काफी कम हो जाती है।

घर पर की जाने वाली जांच में मैग्नेट टेस्ट भी मददगार होता है। चांदी में चुंबकीय गुण नहीं होते, इसलिए अगर वह मैग्नेट से चिपकती है, तो उसमें दूसरी धातु मिली हो सकती है। इसी तरह बर्फ वाला टेस्ट भी काफी लोकप्रिय है—चांदी गर्मी की बेहतरीन संवाहक होती है, इसलिए उस पर रखी बर्फ जल्दी पिघलती है। नकली धातु पर बर्फ अपेक्षाकृत धीरे पिघलती है।

आवाज से भी पहचान की जा सकती है। असली चांदी को हल्के से ठोकने पर साफ और देर तक गूंजने वाली टन-टन की आवाज आती है, जबकि नकली या मिश्रित धातु की आवाज भारी और जल्दी खत्म हो जाती है। रंग और चमक पर भी ध्यान देना जरूरी है। असली चांदी की चमक हल्की सफेद होती है, बहुत ज्यादा पीली या जरूरत से ज्यादा चमकीली नहीं। काली पड़ना हमेशा नकली होने का संकेत नहीं है, क्योंकि शुद्ध चांदी भी ऑक्सीडेशन से काली हो सकती है।

अगर पूरी तरह निश्चिंत होना चाहते हैं, तो किसी भरोसेमंद ज्वेलर या लैब में टेस्ट कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। एसिड टेस्ट या एक्स-रे फ्लोरेसेंस जैसी तकनीकों से चांदी की शुद्धता का सही आकलन हो जाता है। खरीदते वक्त हमेशा बिल लें, हॉलमार्क जांचें और जरूरत से ज्यादा सस्ती चांदी से सतर्क रहें। थोड़ी सावधानी आपको बड़ी ठगी से बचा सकती है।

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