बसंत को यूं ही फूलों का मौसम नहीं कहा जाता। हल्की ठंड, गुनगुनी धूप और हरियाली के बीच अगर बगिया रंग-बिरंगे फूलों से भर जाए, तो उसका सौंदर्य देखते ही बनता है। लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि पौधे लगाने के बावजूद बसंत में फूल कम आते हैं। वजह साफ है—सही समय पर जरूरी देखभाल न होना। अगर आप चाहते हैं कि इस बार गुलाब, गेंदा, पेटुनिया और दूसरे मौसमी फूलों से आपकी बगिया महक उठे, तो अभी से कुछ जरूरी काम कर लेना बेहद जरूरी है।
सबसे पहले मिट्टी पर ध्यान दें, क्योंकि अच्छी मिट्टी ही अच्छे फूलों की नींव होती है। गमलों या क्यारियों की मिट्टी को पलटकर उसमें गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं। इससे मिट्टी उपजाऊ बनेगी और पौधों की जड़ें मजबूत होंगी। इसके बाद सर्दियों में सूखी और कमजोर टहनियों की छंटाई करना न भूलें। खासकर गुलाब जैसे पौधों में सही प्रूनिंग करने से बसंत में ज्यादा कलियां निकलती हैं और पौधा नई ऊर्जा के साथ बढ़ता है।
पानी देने में संतुलन बनाए रखना भी बहुत जरूरी है। बसंत में न जरूरत से ज्यादा पानी दें और न ही पौधों को सूखने दें। जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूख जाए, तभी पानी देना सबसे सही तरीका माना जाता है। साथ ही धूप का खास ख्याल रखें। ज्यादातर फूलों वाले पौधों को रोज़ाना 4 से 6 घंटे की सीधी धूप चाहिए। सुबह की हल्की धूप फूलों के लिए सबसे फायदेमंद होती है, इसलिए गमलों को ऐसी जगह रखें जहां सूरज की रोशनी ठीक से पहुंचे।
बसंत के मौसम में कीट और बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। समय-समय पर नीम तेल या किसी घरेलू कीटनाशक का छिड़काव करते रहें, ताकि पौधे सुरक्षित रहें और फूलों की गुणवत्ता खराब न हो। थोड़ी-सी नियमित मेहनत और सही देखभाल से आपकी बगिया न सिर्फ स्वस्थ रहेगी, बल्कि बसंत आते-आते फूलों से भरकर हर किसी का मन मोह लेगी।