भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता अब सिर्फ कूटनीतिक दस्तावेज नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खर्च पर दिखने वाला है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होते ही भारत में लग्जरी कारें, यूरोपीय वाइन, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं तक सस्ती होने की उम्मीद है। यही वजह है कि इसे हाल के वर्षों की सबसे असरदार आर्थिक डील माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस करार को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ व्यापार बढ़ाने की डील नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में स्थिरता और साझा समृद्धि का नया मॉडल है, जो भारत और यूरोपीय संघ के रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
इस समझौते का सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाला पहलू लग्जरी कारों की कीमतों से जुड़ा है। अभी 15 हजार यूरो से महंगी यूरोपीय कारों पर करीब 40 फीसदी तक आयात शुल्क लगता है, लेकिन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इसे चरणबद्ध तरीके से घटाकर लगभग 10 फीसदी तक लाने की तैयारी है। सरकार इसे कोटा सिस्टम के जरिए लागू करेगी, ताकि घरेलू ऑटो इंडस्ट्री को नुकसान न पहुंचे। इसके बाद BMW, Mercedes-Benz, Lamborghini, Porsche और Audi जैसी प्रीमियम कारें भारतीय बाजार में पहले से कहीं ज्यादा सुलभ हो सकती हैं और कीमतों में लाखों रुपये तक की गिरावट संभव है।
शराब और वाइन के शौकीनों के लिए भी यह डील राहत लेकर आई है। यूरोप से आयात होने वाली महंगी वाइन पर अभी करीब 150 फीसदी तक टैक्स लगता है, जिसे घटाकर लगभग 20 फीसदी करने का रास्ता खुल गया है। हालांकि सस्ती वाइन पर यह छूट नहीं मिलेगी। इसके साथ ही भारतीय वाइन को भी यूरोपीय संघ के 27 देशों में बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है। यह पूरा बदलाव एक साथ नहीं, बल्कि सात साल की अवधि में धीरे-धीरे लागू किया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में इस समझौते का असर सबसे ज्यादा मानवीय माना जा रहा है। कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली यूरोपियन दवाएं और मेडिकल उपकरण सस्ते हो सकते हैं। इसके साथ ही भारत में बनी जेनेरिक दवाओं को यूरोप के बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी, जिससे भारतीय फार्मा कंपनियों का निर्यात बढ़ेगा और देश की दवा उद्योग को वैश्विक मजबूती मिलेगी।
टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए भी यह डील अहम है। मोबाइल फोन, हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स और विमान के स्पेयर पार्ट्स पर लगने वाले टैरिफ खत्म या बेहद कम किए जाएंगे। इससे भारत में इन उत्पादों के निर्माण की लागत घटेगी, उपभोक्ताओं को सस्ते गैजेट्स मिलेंगे और ‘मेक इन इंडिया’ को नई रफ्तार मिलेगी।
स्टील, आयरन और केमिकल उत्पादों पर शून्य टैरिफ का प्रस्ताव कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल सेक्टर की लागत कम कर सकता है। इसका असर रियल एस्टेट से लेकर आम घर खरीदार तक को राहत के रूप में मिल सकता है। वहीं कपड़ा, चमड़ा और ज्वेलरी जैसे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा है कि भारत–EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट सिर्फ एक कारोबारी समझौता नहीं, बल्कि भविष्य की साझेदारी की नींव है। दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाली यह डील आने वाले वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका और घरेलू अर्थव्यवस्था दोनों को मजबूती देने वाली साबित हो सकती है।