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सोना–चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड: 28 दिन में चांदी ₹1.31 लाख उछली, सोना ₹1.63 लाख के पार

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सोना और चांदी की कीमतों ने निवेशकों और आम खरीदारों—दोनों को चौंका दिया है। लगातार तीसरे दिन की तेज़ी के साथ कीमती धातुएं अब अपने ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच चुकी हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, एक किलो चांदी की कीमत एक ही दिन में ₹17,257 उछलकर ₹3,61,821 प्रति किलो हो गई। सिर्फ दो दिनों में चांदी ₹44,116 महंगी हो चुकी है, जबकि जनवरी के महज 28 दिनों में इसमें कुल ₹1,31,401 की ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई है।

सोने की चाल भी किसी से कम नहीं रही। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹4,926 की छलांग के साथ ₹1,63,827 पर पहुंच गया है। दो दिनों में सोना ₹9,517 महंगा हुआ है। अगर महीने भर की तस्वीर देखें, तो 31 दिसंबर 2025 के मुकाबले सोना अब तक ₹30,632 महंगा हो चुका है। यानी नया साल शुरू होते ही कीमती धातुओं ने निवेश की परिभाषा ही बदल दी है।

देश के बड़े शहरों में सोने के भाव भी इसी तेजी को दिखा रहे हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और रायपुर जैसे शहरों में 24 कैरेट सोना करीब ₹1.65 लाख के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि चेन्नई में यह ₹1.67 लाख के पार निकल चुका है। अलग-अलग कैरेट में भी सोने के दाम नई ऊंचाइयों पर हैं—22 कैरेट ₹1.50 लाख, 18 कैरेट ₹1.22 लाख और 14 कैरेट करीब ₹95,800 प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच चुका है।

इस बेमिसाल तेजी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव सबसे बड़ा फैक्टर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक नीति और यूरोपीय देशों को टैरिफ की धमकियों से ट्रेड वॉर का डर बढ़ा है। ऐसे माहौल में निवेशक शेयर बाजार से निकलकर सुरक्षित निवेश यानी सोने-चांदी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।

दूसरी बड़ी वजह रुपये की ऐतिहासिक कमजोरी है। डॉलर के मुकाबले रुपया ₹91.10 के ऑल-टाइम लो पर पहुंच चुका है। इसका सीधा असर सोने की घरेलू कीमतों पर पड़ा है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात होने वाले सोने की लागत काफी बढ़ गई है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये की कमजोरी ने सोने को भारत में और महंगा बना दिया है।

तीसरा बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की भारी खरीदारी है। भारतीय रिज़र्व बैंक समेत दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सोने की खरीद बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़े बताते हैं कि 2025 की रिकॉर्ड खरीद के बाद 2026 की शुरुआत में भी मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे सप्लाई-डिमांड का संतुलन बिगड़ गया है।

चांदी की तेजी के पीछे भी कहानी कम दिलचस्प नहीं है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में बढ़ती इंडस्ट्रियल डिमांड ने चांदी को सिर्फ ज्वेलरी मेटल नहीं, बल्कि रणनीतिक कच्चा माल बना दिया है। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ को लेकर डर की वजह से कंपनियां पहले से भारी स्टॉक जमा कर रही हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई पर दबाव बढ़ा है।

बाजार जानकारों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय तनाव और टैरिफ विवाद और गहराते हैं, तो आने वाले महीनों में सोना ₹1.90 लाख प्रति 10 ग्राम तक और चांदी ₹4 लाख प्रति किलो तक पहुंच सकती है। ऐसे में निवेशकों और खरीदारों के लिए सतर्क रहना जरूरी है।

खरीदारी करते वक्त विशेषज्ञ सर्टिफाइड गोल्ड लेने और कीमत को IBJA जैसे भरोसेमंद स्रोतों से क्रॉस-चेक करने की सलाह दे रहे हैं। वहीं चांदी खरीदते समय उसकी शुद्धता जांचना भी जरूरी है, क्योंकि बढ़ती कीमतों के साथ मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है।

कुल मिलाकर, 2026 की शुरुआत ने साफ कर दिया है कि सोना-चांदी सिर्फ गहने नहीं, बल्कि इस वक्त वैश्विक अनिश्चितता के सबसे बड़े पैमाने बन चुके हैं।

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