जब माता-पिता छोटे बच्चों का आधार कार्ड देखते हैं, तो सबसे पहले उसका नीला रंग ध्यान खींचता है। यही ब्लू आधार कार्ड है, जो पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए जारी किया जाता है। यह आधार कार्ड आम आधार से थोड़ा अलग होता है और इसके पीछे बच्चों की उम्र और पहचान से जुड़ी खास वजहें होती हैं।
ब्लू आधार की सबसे अहम बात यह है कि इसमें बच्चे की बायोमेट्रिक जानकारी नहीं ली जाती। न उंगलियों के निशान और न ही आंखों की स्कैनिंग। वजह साफ है—इस उम्र में बच्चों के शारीरिक और बायोमेट्रिक फीचर्स तेजी से बदलते हैं, जिससे स्थायी पहचान तय करना व्यावहारिक नहीं होता। इसी कारण बच्चे का आधार पूरी तरह से उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक के आधार से लिंक किया जाता है।
इस नीले आधार कार्ड में बच्चे का नाम, जन्मतिथि, लिंग, फोटो और 12 अंकों का आधार नंबर दर्ज होता है। साथ ही उस माता या पिता का आधार नंबर भी जुड़ा रहता है, जिनके जरिए बच्चे का आधार बनवाया गया है। यह आधार नंबर एक बार जारी हो जाने के बाद जीवनभर वही रहता है, उम्र के साथ बदलता नहीं।
ब्लू आधार बनवाने की प्रक्रिया भी काफी आसान है। माता-पिता को बच्चे को किसी अधिकृत आधार नामांकन केंद्र पर ले जाना होता है। कम से कम एक अभिभावक का आधार होना जरूरी होता है। बच्चे की बेसिक जानकारी दर्ज की जाती है, फोटो ली जाती है और अभिभावक के आधार से सत्यापन के बाद बच्चे को आधार नंबर जारी कर दिया जाता है।
जैसे ही बच्चा पांच साल का होता है, पहला अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट जरूरी हो जाता है। इस चरण में बच्चे के फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन और नई फोटो ली जाती है। यह अपडेट सात साल की उम्र से पहले कराना जरूरी माना गया है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं किया गया तो आधार से जुड़ा सत्यापन रुक सकता है और स्कूल एडमिशन या अन्य सरकारी कामों में दिक्कत आ सकती है।
इसके बाद दूसरा और अंतिम अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट 15 साल की उम्र में किया जाता है। किशोरावस्था में शरीर और पहचान में आने वाले बदलावों को ध्यान में रखकर यह अपडेट जरूरी होता है। इन दोनों ही अपडेट के बावजूद आधार नंबर वही रहता है, केवल रिकॉर्ड अपडेट होता है।
कानूनी तौर पर बच्चों के लिए आधार कार्ड अनिवार्य नहीं है, लेकिन व्यवहारिक रूप से इसकी जरूरत लगातार बढ़ रही है। स्कूल में दाखिले, सरकारी स्वास्थ्य योजनाएं, छात्रवृत्ति, बैंकिंग सेवाएं और कई अन्य प्रक्रियाओं में आधार मांगा जाता है। यही वजह है कि आज ज्यादातर माता-पिता बच्चों का आधार शुरुआती उम्र में ही बनवा रहे हैं।
ब्लू आधार कार्ड की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती। जरूरी बायोमेट्रिक अपडेट पूरे होने के बाद यह अपने-आप सामान्य आधार कार्ड की तरह काम करने लगता है। माता-पिता के लिए बस दो उम्र के पड़ाव याद रखना जरूरी है—पांच साल और पंद्रह साल।