जासूसी नहीं, डेटा का खेल: इंस्टाग्राम कैसे जान लेता है आपकी पसंद और वही विज्ञापन दिखाता है

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कभी ऐसा महसूस हुआ है कि आपने किसी दोस्त से बस किसी चीज़ का ज़िक्र किया और थोड़ी ही देर में वही विज्ञापन Instagram पर दिखने लगा? इसी वजह से लोगों के मन में यह शक गहराता है कि क्या इंस्टाग्राम हमारी बातें सुनता है। लेकिन इस पर खुद इंस्टाग्राम प्रमुख Adam Mosseri ने साफ कहा है कि ऐप माइक्रोफोन के ज़रिए आपकी बातचीत नहीं सुनता। सच्चाई इससे कहीं ज़्यादा तकनीकी और चौंकाने वाली है।

असल में इंस्टाग्राम आपकी ऑनलाइन आदतों को बेहद बारीकी से समझता है। आप क्या सर्च करते हैं, किन पोस्ट्स को लाइक करते हैं, क्या सेव करते हैं, किस तरह के वीडियो ज़्यादा देर तक देखते हैं—इन सबका पैटर्न बनाया जाता है। यही नहीं, Meta के टूल्स जैसे कुकीज़ और मेटा पिक्सेल के ज़रिए यह दूसरी वेबसाइटों और ऐप्स पर आपकी गतिविधियों को भी जोड़कर देखता है। नतीजा यह होता है कि विज्ञापन इतने सटीक लगते हैं कि वे “सुनी हुई बात” जैसे महसूस होने लगते हैं, जबकि वे असल में आपकी डिजिटल परछाईं होते हैं।

अगर आप इस हाइपर-पर्सनलाइज्ड विज्ञापन सिस्टम से दूरी बनाना चाहते हैं, तो इसके लिए मेटा ने सेटिंग्स में विकल्प दिए हैं। इंस्टाग्राम प्रोफाइल से अकाउंट सेंटर में जाकर आप विज्ञापन से जुड़ी जानकारी के इस्तेमाल को सीमित कर सकते हैं। बाहरी वेबसाइटों और ऐप्स से आने वाले डेटा को बंद करने पर इंस्टाग्राम आपकी ऑफ-ऐप एक्टिविटी के आधार पर विज्ञापन दिखाना बंद कर देता है। हालांकि ध्यान रखने वाली बात यह है कि इससे विज्ञापन खत्म नहीं होंगे, बस उनका आधार बदल जाएगा।

प्राइवेसी के नजरिए से यह समझना ज़रूरी है कि आज के दौर में ऐप्स हमारी बातों से ज़्यादा हमारी आदतें “सुनते” हैं। इसलिए समय-समय पर अपनी एड प्रेफरेंस और ऑफ-मेटा एक्टिविटी की सेटिंग्स चेक करना ही सबसे बेहतर तरीका है, ताकि आपकी स्क्रीन पर वही दिखे जो आप सच में देखना चाहते हैं—ना कि वो, जो एल्गोरिदम ने आपके लिए तय कर दिया हो।

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