छत्तीसगढ़ सरकार ने युवा सशक्तिकरण को केवल एक योजना नहीं, बल्कि राज्य के विकास का आधार बना दिया है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai के नेतृत्व में 2024–25 से लागू और पुनर्गठित पहलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य का फोकस शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक, हर उस कड़ी को मजबूत करने पर है जो युवाओं को आत्मनिर्भर, प्रतिस्पर्धी और नेतृत्वक्षम बनाती है। यही वजह है कि आज छत्तीसगढ़ का सशक्तिकरण मॉडल केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं, बल्कि एक टिकाऊ भविष्य की नींव रख रहा है।
दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल योजना इसका सशक्त उदाहरण है, जहां सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई है। इस विस्तार ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अवसरों का दायरा चौड़ा किया है। वर्षों में यहां से निकले अभ्यर्थियों ने आईआरएस, सहायक कमांडेंट, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य प्रशासनिक पदों पर चयन पाकर यह साबित किया है कि सही संसाधन और मार्गदर्शन मिलें तो प्रतिभा सीमाओं में नहीं बंधती।
राजीव युवा उत्थान योजना को नए सिरे से इस तरह ढाला गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवा आईएएस, आईपीएस, सीजीपीएससी, एसएससी और बैंकिंग जैसी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कर सकें। राज्य और दिल्ली के प्रतिष्ठित संस्थानों में कोचिंग, आधुनिक अध्ययन सामग्री और हॉस्टल सुविधाओं ने समान अवसर की अवधारणा को जमीन पर उतारा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री निःशुल्क कोचिंग सहायता योजना ने श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं के दरवाजे खोले हैं, जहां छात्रवृत्ति से आगे बढ़कर पूर्ण प्रशिक्षण मॉडल अपनाया गया है।
पढ़ाई के बदलते स्वरूप को देखते हुए नालंदा परिसर जैसी पहलें युवाओं को 24×7 अध्ययन का आधुनिक वातावरण दे रही हैं। डिजिटल संसाधन, समूह चर्चा और मानसिक रूप से अनुकूल अध्ययन क्षेत्र आज की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए गए हैं। रायपुर में फेस–2 के भूमिपूजन के साथ यह स्पष्ट है कि सरकार दीर्घकालिक निवेश के जरिए ज्ञान-अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। वहीं छात्रावास और आश्रमों को आवास से आगे बढ़ाकर शैक्षणिक केंद्रों में बदलने की दिशा में उठाए गए कदम ग्रामीण और आदिवासी छात्रों के लिए निर्णायक साबित हो रहे हैं।
शिक्षा के साथ-साथ खेल को भी राज्य ने सशक्तिकरण का माध्यम बनाया है। हर विकासखंड में मिनी स्टेडियम और बस्तर ओलंपिक जैसी पहलों ने खेल के मैदान को सामाजिक एकीकरण का मंच बना दिया है। रिकॉर्ड पंजीकरण और आत्मसमर्पित नक्सलियों की भागीदारी ने यह संदेश दिया है कि खेल बंदूक से बड़ा विकल्प बन सकता है। ‘बस्तर खेलेगा, बस्तर बढ़ेगा’ केवल नारा नहीं, बल्कि शांति और आत्मविश्वास की नई कहानी है।
उद्यमिता के मोर्चे पर उद्यम-क्रांति और मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना ने बिना ब्याज ऋण, अनुदान और सरल प्रक्रियाओं के जरिए युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है। 18 से 35 वर्ष के युवाओं के लिए यह योजनाएं केवल रोजगार नहीं, बल्कि सम्मानजनक आजीविका का रास्ता खोल रही हैं, खासकर एससी/एसटी, ओबीसी, महिलाओं और दिव्यांग युवाओं के लिए।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री साय की सोच और ‘मोदी की गारंटी’ के साथ तालमेल ने छत्तीसगढ़ में शिक्षा, कौशल, खेल और उद्यमिता की एक मजबूत प्रणाली खड़ी कर दी है। यह सशक्तिकरण मॉडल बताता है कि राज्य का भविष्य उन्हीं युवाओं के कंधों पर सुरक्षित है, जिन्हें आज अवसर, आत्मविश्वास और सही दिशा दी जा रही है।