सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के वरिष्ठ प्रबंधन एवं कर्मचारियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता सुदृढ़ीकरण तथा प्रभावी निर्णय-निर्माण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से दिनांक 28 एवं 29 जनवरी 2026 को एचआर– ज्ञानार्जन एवं विकास (बीएमडीसी), सेक्टर-7 में दो दिवसीय ‘बॉडी, माइंड एंड हार्ट’ कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) श्री पवन कुमार रहे। इस दो दिवसीय कार्यशाला में विभिन्न विभागों से कुल 29 प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
अपने संबोधन में श्री पवन कुमार ने आज के चुनौतीपूर्ण संगठनात्मक परिवेश में आंतरिक संतुलन, भावनात्मक स्थिरता तथा आत्म-जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सतत उत्पादकता एवं नेतृत्व में उत्कृष्टता तभी संभव है, जब शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक सुदृढ़ता के बीच संतुलन बना रहे।
कार्यक्रम की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए महाप्रबंधक प्रभारी (एचआर–एल एंड डी) श्री एस. के. श्रीवास्तव ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला तथा स्वागत उद्बोधन दिया। उद्घाटन सत्र में महाप्रबंधक (एचआर–एल एंड डी) श्री सौरभ वार्ष्णेय भी उपस्थित रहे।
इस कार्यशाला का संचालन जयगंगा लाइफ कोचिंग अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष एवं प्रधान मार्गदर्शक श्री किरण द्वारा किया गया। संवादात्मक सत्रों, अनुभवात्मक अधिगम एवं आत्म-चिंतन आधारित अभ्यासों के माध्यम से उन्होंने नेतृत्व व्यवहार, कार्यस्थल संबंधों तथा व्यक्तिगत प्रभावशीलता में शरीर, मन और हृदय की परस्पर भूमिका को रेखांकित किया। सत्रों के दौरान तनाव प्रबंधन, दृष्टिकोण विकास, संवाद कौशल, सहानुभूति, ऊर्जा प्रबंधन एवं सचेत निर्णय-निर्माण जैसे विषयों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
कार्यशाला के अंतर्गत प्रतिभागियों को ध्यान, चिंतन एवं अनुभवात्मक अभ्यास जैसे व्यावहारिक साधनों से भी परिचित कराया गया, जिनका उद्देश्य एकाग्रता, सकारात्मक दृष्टिकोण, पारस्परिक सौहार्द तथा समग्र स्फूर्ति को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों में संगठन के प्रति स्वामित्व भाव, गर्व एवं अपनत्व की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम का संचालन श्री के. शिवा एवं सुश्री वैभव लक्ष्मी दुबे द्वारा किया गया व कार्यक्रम के समन्वयक श्री विकास सरीन रहे। समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन महाप्रबंधक (एचआर–एल एंड डी) श्री सौरभ वार्ष्णेय द्वारा प्रस्तुत किया गया।