भारत-अमेरिका के बीच अहम व्यापार समझौते की सहमति के ठीक बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश महज़ प्रेरक वक्तव्य नहीं, बल्कि एक स्पष्ट रणनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आत्मविश्वास को राष्ट्र निर्माण की असली शक्ति बताते हुए कहा कि यही ऊर्जा विकसित भारत के संकल्प को साकार करेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई गति देने वाला फैसला सामने आया है।
प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में संस्कृत श्लोक साझा कर यह भाव स्पष्ट किया कि समृद्धि साहस और आत्मविश्वास से जन्म लेती है, कौशल और दक्षता उसे स्थिरता देते हैं और अनुशासन उसे राष्ट्र की उन्नति के लिए उपयोगी बनाता है। संदेश का निहितार्थ साफ है—भारत अब वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ फैसले लेने और अपने हितों को मजबूती से आगे रखने की स्थिति में है।
इस संदेश की पृष्ठभूमि में भारत-अमेरिका ट्रेड डील की सहमति है, जिसके तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले पारस्परिक टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक्स पर पोस्ट कर इस समझौते की जानकारी दी थी और प्रधानमंत्री मोदी को “सबसे अच्छा दोस्त” बताते हुए कहा था कि यह डील आपसी सम्मान और भरोसे का परिणाम है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री मोदी के अनुरोध पर टैरिफ में कटौती का फैसला लिया गया।
हालांकि शुरुआती घंटों में भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से औपचारिक बयान नहीं आया था, लेकिन प्रधानमंत्री के पोस्ट ने यह संकेत दे दिया कि दोनों नेताओं के बीच सहमति बन चुकी है और बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगी और टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो पार्ट्स व आईटी जैसे क्षेत्रों को अमेरिकी बाजार में नई प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
कुल मिलाकर, पीएम मोदी का आत्मविश्वास पर दिया गया संदेश केवल प्रेरणा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की नई मुद्रा का ऐलान है—जहां साहस, कौशल और अनुशासन के सहारे आर्थिक कूटनीति को आगे बढ़ाया जा रहा है और भारत-अमेरिका साझेदारी को ठोस आधार मिल रहा है।