अमेरिका के साथ ट्रेड डील फाइनल होने की खबर ने मंगलवार, 3 फरवरी 2026 की सुबह भारतीय शेयर बाजार की तस्वीर ही बदल दी। बाजार खुलते ही ऐसी आक्रामक खरीदारी देखने को मिली, जिसने महज 20 मिनट में निवेशकों की दौलत में करीब ₹20 लाख करोड़ का इजाफा कर दिया। सोमवार को कारोबार बंद होने के समय BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग ₹455 लाख करोड़ था, जो शुरुआती कारोबार में उछलकर करीब ₹474 लाख करोड़ तक पहुंच गया। बाद में उतार-चढ़ाव जरूर दिखा, लेकिन शुरुआती तेजी ने यह साफ कर दिया कि बाजार ने इस डील को बेहद सकारात्मक संकेत के तौर पर लिया है।
इस ऐतिहासिक उछाल की जड़ में भारत-अमेरिका के बीच हुई वही ट्रेड एग्रीमेंट है, जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के बाद की। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है। इस फैसले ने भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में अचानक ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना दिया, खासकर ऐसे समय में जब कई एशियाई देशों पर अब भी ऊंचे टैरिफ लागू हैं। यही वजह है कि निवेशकों को लगा कि आने वाले महीनों में भारत के निर्यात और कॉर्पोरेट मुनाफे में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
ट्रेड डील का असर सिर्फ शेयरों तक सीमित नहीं रहा। शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया एक फीसदी से ज्यादा मजबूत होकर करीब 90.40 प्रति डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 6.72 फीसदी पर आ गई। रुपये की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने मिलकर बाजार को यह संकेत दिया कि विदेशी निवेश के लिए माहौल और अनुकूल हो रहा है, जिससे जोखिम लेने की भूख और बढ़ गई।
सेक्टरल स्तर पर सबसे ज्यादा जोश टेक्सटाइल शेयरों में दिखा, जहां लगभग सभी प्रमुख कंपनियों में 20 फीसदी का अपर सर्किट लग गया। निवेशकों को भरोसा है कि इस डील के बाद अमेरिका को कपड़ा और गारमेंट का निर्यात तेज़ी से बढ़ेगा। इसके साथ ही झींगा निर्यात से जुड़ी कंपनियों, ऑटो और अन्य निर्यात आधारित सेक्टरों में भी जोरदार खरीदारी देखने को मिली।
इस उत्साह की झलक इंडेक्स के स्तर पर भी साफ दिखी। Nifty 50 अपने इतिहास की सबसे बड़ी करीब 1,200 अंकों की गैप-अप ओपनिंग के साथ खुला। मिडकैप इंडेक्स 60,000 के पार पहुंच गया और निफ्टी बैंक ने भी 61,400 के ऊपर शुरुआत की। कुल मिलाकर, इंडिया-यूएस ट्रेड डील ने न सिर्फ बाजार का मूड बदला, बल्कि यह भी जता दिया कि सही वैश्विक संकेत मिलते ही भारतीय बाजार कितनी तेजी से इतिहास रच सकता है।