कई लोगों को अचानक कम सुनाई देने लगता है, कान बंद-सा महसूस होता है या भीतर हल्की गूंज सुनाई देती है। अक्सर इसकी वजह कान में जमा मैल यानी ईयर वैक्स होता है। ऐसी स्थिति में लोग जल्दबाज़ी में कॉटन बड या नुकीली चीज़ों से कान साफ करने लगते हैं, जो नुकसानदेह साबित हो सकता है। असल में कान का मैल शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा है, जो धूल-मिट्टी और बैक्टीरिया को अंदर जाने से रोकता है। समस्या तब होती है, जब यही मैल ज़रूरत से ज्यादा जम जाए और बाहर न निकल पाए।
दादी-नानी के समय से चले आ रहे कुछ घरेलू उपाय सही तरीके से अपनाए जाएं, तो कान में जमे मैल को नरम कर बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं। हल्का गुनगुना सरसों का तेल इस मामले में काफी कारगर माना जाता है। 2-3 बूंदें कान में डालकर कुछ मिनट सिर को दूसरी ओर झुकाने से सख्त मैल ढीला होकर बाहर आ सकता है। इसी तरह नारियल तेल भी अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण फायदेमंद है। रोज़ रात को सोने से पहले इसकी 2 बूंदें डालने से सूखा मैल धीरे-धीरे नरम होने लगता है।
अगर मैल ज्यादा सख्त नहीं है, तो गुनगुना पानी भी राहत दे सकता है। साफ ड्रॉपर से थोड़ा गुनगुना पानी डालकर कुछ देर बाद सिर झुकाने से कान साफ महसूस हो सकता है। ग्लिसरीन भी एक पुराना घरेलू नुस्खा है, जो मैल को मुलायम बनाती है। 2-3 दिन तक नियमित इस्तेमाल से कई बार मैल खुद-ब-खुद बाहर निकल आता है। वहीं लहसुन का तेल दादी-नानी के नुस्खों में खास जगह रखता है। सरसों के तेल में लहसुन की कलियां पकाकर, ठंडा करके छान लें और 1-2 बूंद कान में डालें—यह मैल के साथ हल्के संक्रमण में भी आराम दे सकता है।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि कान में कभी भी नुकीली चीज़, माचिस की तीली या पिन न डालें। अगर तेज दर्द, पस या खून आने लगे, तो घरेलू उपाय न अपनाएं और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। बच्चों के कान में कुछ भी डालने से पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेना ज़रूरी है।