बजट सत्र 2026 के दौरान बुधवार को लोकसभा का माहौल पूरी तरह से हंगामे की भेंट चढ़ गया। तय कार्यक्रम के अनुसार आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जवाब देना था, लेकिन विपक्ष के लगातार शोर-शराबे और नारेबाज़ी के कारण कार्यवाही सुचारू रूप से चल नहीं सकी। स्थिति इतनी बिगड़ी कि अंततः लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और अब सदन को गुरुवार तक के लिए टाल दिया गया है।
संसदीय सूत्रों के अनुसार अब संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री गुरुवार, 5 फरवरी को सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपना जवाब देंगे। इस संबोधन को लेकर राजनीतिक गलियारों में पहले से ही हलचल तेज है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोपों और सवालों का सिलसिलेवार जवाब देंगे, साथ ही सरकार की आर्थिक नीतियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास के एजेंडे को मजबूती से सदन के सामने रखेंगे।
सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री के संभावित संबोधन में बजट को लेकर सरकार का दीर्घकालिक विज़न केंद्र में रह सकता है। गरीब, युवा, किसान और महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं, रोजगार, निवेश और देश की मौजूदा आर्थिक स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है। इसके साथ ही सरकार आने वाले समय में किस दिशा में सुधार और नीतिगत फैसले लेने जा रही है, उसके संकेत भी इस भाषण के माध्यम से दिए जा सकते हैं।
बजट सत्र 2026 के लिहाज़ से यह संबोधन इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रधानमंत्री का जवाब सरकार की प्राथमिकताओं और रणनीति को साफ तौर पर सामने लाता है। ऐसे में न केवल संसद और राजनीतिक दलों, बल्कि पूरे देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि भारतीय संसद के पटल पर प्रधानमंत्री कल क्या संदेश देते हैं और हंगामे के बीच ठप पड़े सत्र को किस तरह दिशा देने की कोशिश करते हैं।