शेयर बाजार में 5 फरवरी को सुस्ती साफ दिखी। शुरुआती कारोबार से ही बिकवाली के दबाव में सेंसेक्स करीब 200 अंक टूटकर 83,600 के आसपास फिसल गया, जबकि निफ्टी भी 50 अंकों की गिरावट के साथ 25,700 के स्तर पर ट्रेड करता नजर आया। बाजार की चौड़ाई कमजोर रही—सेंसेक्स के 30 में से 21 और निफ्टी 50 के 37 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। सबसे ज्यादा दबाव ऑटो, मेटल और फार्मा शेयरों पर दिखा, वहीं आईटी और एफएमसीजी में सीमित खरीदारी ने कुछ राहत दी।
गिरावट के पीछे वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों की बड़ी भूमिका रही। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग और चीन का शंघाई कंपोजिट—all दबाव में दिखे। अमेरिकी बाजारों की बात करें तो पिछले सत्र में डाउ जोंस हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ, लेकिन नैस्डैक और एसएंडपी 500 में कमजोरी दर्ज की गई, जिसका असर आज घरेलू सेंटीमेंट पर पड़ा।
निवेशकों के मोर्चे पर विदेशी पूंजी का रुख सतर्क बना रहा। 4 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 250 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने सीमित खरीदारी की। दिसंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि उस महीने एफआईआई की लगातार बिकवाली के बीच डीआईआई की मजबूत खरीद ने ही बाजार को संभालकर रखा था—यही ट्रेंड अब भी निवेशकों के भरोसे का आधार बना हुआ है।
दिलचस्प बात यह है कि गिरावट से ठीक एक दिन पहले बाजार में मजबूती दिखी थी। 4 फरवरी को सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद हुए थे, जहां ऑटो, एनर्जी और एफएमसीजी ने लीड किया था। लेकिन आज ग्लोबल कमजोरी और सेक्टर-विशेष की बिकवाली ने बाजार की रफ्तार थाम दी। कुल मिलाकर, निवेशक फिलहाल सतर्क हैं और अगले संकेतों का इंतजार कर रहे हैं—खासकर वैश्विक बाजारों और संस्थागत प्रवाह से आने वाले ट्रिगर्स का।