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रायपुर निगम में पद की मर्यादा पर सवाल: पत्नी अध्यक्ष, लेकिन जोन पर चलता दिखा पति का आदेश

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रायपुर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के जोन-3 में सामने आया ताज़ा मामला न सिर्फ नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करता है, बल्कि स्थानीय सत्ता संरचना में परदे के पीछे चल रहे प्रभाव को भी उजागर करता है। जल संकट जैसे गंभीर मुद्दे पर बुलाई गई आधिकारिक बैठक में जो दृश्य सामने आया, उसने निगम की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सीधा प्रश्नचिह्न लगा दिया।

जोन-3 की इस बैठक की अध्यक्षता करने की वैधानिक जिम्मेदारी चुनी हुई जोन अध्यक्ष साधना साहू के पास थी, लेकिन बैठक का संचालन करते हुए दिखे उनके पति और पूर्व पार्षद प्रमोद साहू। हैरानी की बात यह रही कि बैठक स्थल पर अध्यक्ष स्वयं और एमआईसी सदस्य भी मौजूद थे, इसके बावजूद पूरी कार्यवाही की कमान पूर्व पार्षद के हाथों में दिखाई दी। यह दृश्य कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए भी असहज करने वाला रहा।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी जोर पकड़ रहे हैं कि जोन क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर प्रमोद साहू के नाम के बोर्ड लगे हुए हैं। यानी काग़ज़ों में पद पत्नी के नाम है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर पहचान, नियंत्रण और प्रभाव पति का दिखाई दे रहा है। इसे न सिर्फ नियमों के खिलाफ बताया जा रहा है, बल्कि नैतिकता और प्रशासनिक मर्यादा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला उल्लंघन है, जहां निर्वाचित प्रतिनिधि के अधिकारों का दुरुपयोग कर एक पूर्व जनप्रतिनिधि खुलेआम तानाशाही रवैया अपना रहा है। आकाश तिवारी के मुताबिक, यदि यही स्थिति रही तो निगम में जनता द्वारा चुने गए पदों का कोई अर्थ ही नहीं रह जाएगा।

राजनीतिक जानकार इस प्रकरण को प्रमोद साहू के पुराने प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। वे पहले भी जोन अध्यक्ष रह चुके हैं और माना जा रहा है कि उसी राजनीतिक पकड़ के चलते वे आज भी जोन-3 में फैसलों की दिशा तय करते नजर आते हैं, भले ही औपचारिक रूप से पद अब उनकी पत्नी के पास हो।

कुल मिलाकर, रायपुर नगर निगम का यह मामला सिर्फ एक बैठक तक सीमित नहीं है। यह उस मानसिकता को उजागर करता है, जहां सत्ता औपचारिक पद से ज़्यादा व्यक्तिगत प्रभाव से चलाई जा रही है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि रायपुर नगर निगम प्रशासन और सरकार इस कथित पद-दुरुपयोग पर क्या रुख अपनाती है।

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