रायपुर से आई इस अहम अपडेट ने धान खरीदी से वंचित रह गए हजारों किसानों को बड़ी राहत दी है। समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की अवधि खत्म होने के बाद भी जिन किसानों के टोकन कट चुके थे या आवेदन के बावजूद धान नहीं बिक पाया था, उनके लिए अब 5 और 6 फरवरी को दो दिन का विशेष अवसर दिया गया है। राज्य भर में ऐसे किसानों की संख्या करीब 50 हजार बताई जा रही है, जिनका धान अब इस अतिरिक्त अवधि में खरीदा जाएगा।
दरअसल, 31 जनवरी को धान खरीदी की आधिकारिक अंतिम तारीख तय थी। इसके पहले 10 जनवरी के बाद टोकन काटने की प्रक्रिया रोक दी गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में किसान ऐसे रह गए, जिनके टोकन कटे थे या आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी सत्यापन या प्रशासनिक अड़चनों के कारण उनका धान नहीं खरीदा जा सका। किसानों की लगातार मांग और जिलों से आई रिपोर्ट के बाद सरकार ने यह फैसला लिया कि ऐसे पात्र किसानों को दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाए।
इस निर्णय के तहत तीन श्रेणियों के किसानों को धान बेचने का मौका मिलेगा। वे किसान जिन्होंने 10 जनवरी के बाद टोकन के लिए आवेदन किया था लेकिन समय पर सत्यापन नहीं हो पाया, वे किसान जिनका आवेदन 10 जनवरी के बाद सत्यापित तो हुआ लेकिन धान मौजूद होने के बावजूद टोकन जारी नहीं किया गया, और वे किसान जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी की तारीख का टोकन मिला था लेकिन किसी वजह से तय दिन पर धान नहीं बेच सके। इन सभी को अब 5 और 6 फरवरी को धान विक्रय की अनुमति दी गई है।
सरकारी आकलन के मुताबिक, इस फैसले के बाद करीब 50 हजार किसानों से लगभग 2 लाख 42 हजार मीट्रिक टन से अधिक धान की अतिरिक्त खरीदी हो सकती है। हालांकि यह राहत सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेगी जिनके टोकन कट चुके थे या जिनका आवेदन रिकॉर्ड में दर्ज है। जिन किसानों को न तो टोकन मिला और न ही वे समितियों में आवेदन कर पाए, उन्हें इस अतिरिक्त खरीदी का लाभ नहीं मिल सकेगा।
प्रशासनिक स्तर पर हुई गड़बड़ियों की वजह से बड़ी संख्या में किसान धान बेचने से चूक गए थे। कई मामलों में समितियों और जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आई, जहां भौतिक सत्यापन सही पाए जाने के बावजूद टोकन जारी नहीं हुए। अब इन्हीं कमियों को सुधारते हुए दो दिन की विशेष खरीदी का रास्ता खोला गया है।
जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो महासमुंद जिले में सबसे ज्यादा 5724 किसानों को इस फैसले का लाभ मिलेगा। इसके बाद बेमेतरा, कवर्धा, दुर्ग, बलौदाबाजार और कांकेर जैसे जिले हैं, जहां हजारों किसान दो दिन में धान बेच सकेंगे। वहीं दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे जिलों में वंचित किसानों की संख्या सबसे कम है।
कुल मिलाकर, यह फैसला उन किसानों के लिए राहत की सांस लेकर आया है जो पूरे सीजन इंतजार के बाद भी धान बेच नहीं पाए थे। अब दो दिन का यह मौका उनके लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसके बाद समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।