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Budget Session 2026: आम बजट पर आज लोकसभा में मंथन, दोपहर बाद प्राइवेट मेंबर बिल्स से बढ़ेगी सियासी हलचल

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भारतीय संसद के बजट सत्र के तहत आज लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पर सामान्य चर्चा की शुरुआत होने जा रही है। सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे प्रश्नकाल से शुरू होगी, जिसके बाद सरकारी कामकाज लिया जाएगा। वित्त मंत्री द्वारा पेश किए गए बजट पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद अपने-अपने तर्क और आपत्तियां रखेंगे, जिससे आर्थिक नीतियों और प्राथमिकताओं को लेकर तीखी बहस के संकेत हैं।

आज की कार्यवाही के दौरान सरकार की ओर से कई अहम मंत्रालयों के मंत्री सदन के पटल पर जरूरी दस्तावेज भी पेश करेंगे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, विधि एवं न्याय, विदेश, रक्षा और पोत परिवहन जैसे मंत्रालयों से जुड़े कागजात रखे जाने हैं। इसके बाद बजट पर चर्चा और आगे बढ़ेगी, जिसमें आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों पर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने नजर आ सकते हैं।

दोपहर बाद लोकसभा का माहौल और अधिक राजनीतिक होने की संभावना है। करीब 3:30 बजे के बाद प्राइवेट मेंबर्स बिजनेस लिया जाएगा, जहां निजी सदस्यों द्वारा कई अहम विधेयक पेश किए जाएंगे। इन प्रस्तावों में संविधान संशोधन से जुड़े बिल, जनप्रतिनिधित्व कानून में बदलाव, किसानों, मछुआरों, छात्रों, वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और श्रमिकों के हितों से जुड़े मसौदे शामिल हैं। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, श्रम सुधार और सामाजिक सुरक्षा जैसे समकालीन विषयों पर भी चर्चा की जमीन तैयार हो सकती है।

इस सत्र में सियासी तापमान पहले से ही ऊंचा है। एक दिन पहले लोकसभा में उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया था, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा से उद्धरण पढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। इस फैसले के विरोध में विपक्षी सांसदों ने जोरदार आपत्ति जताई और सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई।

उधर, राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। एक बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर सिख समुदाय के अपमान का आरोप लगाया और कहा कि इस तरह की टिप्पणियां राजनीतिक अहंकार और गैर-जिम्मेदार सोच को दर्शाती हैं। इस बयान के बाद संसद के बाहर भी राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है।

बजट सत्र का कार्यक्रम पहले से ही लंबा और व्यस्त तय किया गया है। यह सत्र कुल 65 दिनों की अवधि में 30 बैठकों के साथ आयोजित किया जा रहा है। दोनों सदन 13 फरवरी को अवकाश पर जाएंगे और 9 मार्च को दोबारा बैठक शुरू होगी, ताकि विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की जांच के लिए स्थायी समितियां अपना काम कर सकें। मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार, बजट सत्र का समापन 2 अप्रैल को प्रस्तावित है, लेकिन तब तक संसद के भीतर और बाहर सियासी हलचल बने रहने के पूरे आसार हैं।

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