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IND vs ENG U19 Final: 14 साल के वैभव सूर्यवंशी का तूफान, 55 गेंद में शतक ठोक अंडर-19 वर्ल्ड कप इतिहास में रचा नया अध्याय

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अंडर-19 विश्व कप फाइनल में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे महामुकाबले में क्रिकेट की दुनिया ने एक ऐसा नजारा देखा, जिसने रिकॉर्ड बुक्स को हिला दिया। महज 14 साल के भारतीय ओपनर वैभव सूर्यवंशी ने दबाव भरे फाइनल में 55 गेंदों में शतक ठोककर न सिर्फ भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया, बल्कि अंडर-19 विश्व कप के इतिहास में अपनी जगह हमेशा के लिए दर्ज करा ली।

यह वैभव का अंडर-19 वर्ल्ड कप में पहला शतक है और गेंदों के लिहाज से टूर्नामेंट इतिहास की दूसरी सबसे तेज सेंचुरी। उनसे तेज शतक सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के विल मलाज्ज़ुक के नाम है, जिन्होंने 51 गेंदों में यह कारनामा किया था। हरारे की पिच पर, जहां शुरुआती ओवरों में नमी ने बल्लेबाजों को परेशान किया, वहां वैभव ने संयम के साथ शुरुआत की और फिर ऐसा गियर बदला कि इंग्लिश गेंदबाज बेबस नजर आए।

यूथ वनडे क्रिकेट में भी वैभव सूर्यवंशी अब रफ्तार का दूसरा नाम बन चुके हैं। इस पारी से पहले ही वे इंग्लैंड के खिलाफ 52 गेंद और यूएई के खिलाफ 56 गेंद में शतक जमा चुके थे। अब 55 गेंद में आई यह सेंचुरी उनके करियर का एक और ऐतिहासिक अध्याय बन गई। यूथ वनडे में सबसे तेज शतक का रिकॉर्ड भले ही समीर मिन्हास के नाम हो, लेकिन लगातार टॉप-5 में वैभव का नाम आना उनकी असाधारण प्रतिभा का सबूत है।

छक्कों के मामले में भी इस टूर्नामेंट में वैभव सूर्यवंशी ने नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया है। 2026 अंडर-19 वर्ल्ड कप में वे अब तक 20 से ज्यादा छक्के जड़ चुके हैं, जो किसी भी बल्लेबाज द्वारा एक संस्करण में सबसे अधिक हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड साउथ अफ्रीका के डेवाल्ड ब्रेविस के नाम था, जिन्होंने 2022 में 18 छक्के लगाए थे। फाइनल जैसी बड़ी स्टेज पर यह रिकॉर्ड बनना इस पारी को और खास बना देता है।

इतना ही नहीं, वैभव यूथ वनडे क्रिकेट में 100 छक्के पूरे करने वाले सबसे तेज बल्लेबाज भी बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि सिर्फ 25 पारियों में हासिल की, जिससे उन्होंने बांग्लादेश के जवाद अबरार का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। यह उनका यूथ वनडे करियर का चौथा शतक है, जिसके साथ वे भारतीय बल्लेबाजों में शुभमन गिल और विजय ज़ोल के बराबर पहुंच गए हैं। अब उनसे आगे सिर्फ उन्मुक्त चंद हैं, जिनके नाम 5 शतक दर्ज हैं।

फाइनल में वैभव ने कप्तान आयुष म्हात्रे के साथ मिलकर सिर्फ 90 गेंदों में 142 रन की साझेदारी कर भारत को मजबूत आधार दिया। एक समय मुश्किल नजर आ रही पिच पर उन्होंने 9 चौके और 8 छक्के उड़ाकर यह दिखा दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है, हुनर और हौसला कहीं बड़ा होता है। अंडर-19 विश्व कप के मंच पर यह पारी आने वाले सालों तक याद रखी जाएगी—एक ऐसे सितारे के जन्म के तौर पर, जो भारतीय क्रिकेट का भविष्य बदलने की क्षमता रखता है।

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