बिहार की बिहार सरकार ने बजट 2026-27 में महिलाओं को केंद्र में रखकर अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक रोडमैप पेश किया है। कुल 3.46 लाख करोड़ रुपये के राज्य बजट में से करीब ₹48,000 करोड़ की राशि सीधे तौर पर महिलाओं के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तीकरण के लिए तय की गई है। सरकार का स्पष्ट संदेश है—महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, तभी विकास की रफ्तार टिकाऊ होगी। इस बड़े आवंटन से शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और स्वरोजगार के मोर्चे पर ठोस बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्राथमिक योजना ‘सात निश्चय-3’ में भी महिलाओं की भूमिका निर्णायक दिखाई देती है। अगले वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना पर लगभग ₹14,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी है, जिसमें से करीब ₹9,000 करोड़ सिर्फ महिला-केंद्रित कार्यक्रमों पर फोकस करेगा। सरकार का मानना है कि आत्मनिर्भर महिलाएं ही राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं, इसलिए योजनाओं की डिज़ाइन से लेकर क्रियान्वयन तक महिलाओं को केंद्र में रखा गया है।
जेंडर बजट को लेकर भी इस बार दायरा बढ़ाया गया है। जहां पिछले वर्ष 25 विभागों की रिपोर्टिंग शामिल थी, वहीं 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 27 हो गई है। बजट सत्र के अंतिम सप्ताह में पेश होने वाला जेंडर बजट यह साफ करेगा कि किस विभाग की योजनाओं में महिलाओं की कितनी हिस्सेदारी है और वास्तविक खर्च कितना हो रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और योजनाओं के प्रभाव का आकलन आसान होगा।
महिला सशक्तीकरण और आत्मनिर्भरता के लिए अलग से ₹9,052 करोड़ 32 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। इस फंड से जीविका दीदियों, छात्राओं और ग्रामीण महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण, छोटे उद्योगों से जोड़ने, और सामाजिक सुरक्षा देने पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ सिर्फ कागज़ों तक सीमित न रहे, बल्कि हर वर्ग की महिला तक सीधे पहुंचे।
कुल मिलाकर, बिहार बजट 2026-27 महिलाओं के लिए सिर्फ खर्च का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक नीतिगत दिशा का संकेत है—जहां शिक्षा से रोजगार और सुरक्षा से आत्मनिर्भरता तक, हर मोर्चे पर महिलाओं को आगे बढ़ाने की ठोस कोशिश दिखती है।