हरारे स्पोर्ट्स क्लब की पिच पर शुक्रवार की रात भारतीय क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। भारत अंडर-19 क्रिकेट टीम ने अंडर-19 क्रिकेट विश्व कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड अंडर-19 क्रिकेट टीम को 100 रनों से रौंदते हुए छठी बार विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया। इस ऐतिहासिक जीत की नींव एक ऐसी पारी ने रखी, जिसे लंबे समय तक याद किया जाएगा—सलामी बल्लेबाज़ वैभव सूर्यवंशी के बल्ले से निकले 175 रन।
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत ने आक्रामक इरादों का एलान शुरू से ही कर दिया। 20 के स्कोर पर पहला विकेट गिरने के बाद वैभव सूर्यवंशी और कप्तान आयुष म्हात्रे ने पारी को न सिर्फ संभाला, बल्कि इंग्लिश गेंदबाज़ी पर दबाव भी बनाया। दोनों के बीच हुई 142 रनों की साझेदारी ने मैच की दिशा तय कर दी। म्हात्रे के अर्धशतक के बाद वैभव ने गियर बदला और मैदान के चारों ओर शॉट्स की बारिश कर दी। वेदांत त्रिवेदी के साथ तेज़ साझेदारी ने स्कोर को 250 के पार पहुंचाया और उसके बाद भी भारतीय रन मशीन थमी नहीं।
वैभव सूर्यवंशी की 175 रनों की पारी सिर्फ आंकड़ों की कहानी नहीं थी, बल्कि यह आत्मविश्वास, तकनीक और निडरता का प्रदर्शन थी—80 गेंदों में 15 चौके और 15 छक्के, हर स्ट्रोक में संदेश साफ़ था। अंत में अभिज्ञान कुंडु और कनिष्क चौहान की तेज़ पारियों ने भारत को 411/9 के विशाल स्कोर तक पहुंचाया, जो फाइनल के दबाव में किसी पहाड़ से कम नहीं था।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत लड़खड़ा गई। शुरुआती झटकों ने उनकी योजना को पटरी से उतार दिया। बीच में बेन डॉकिन्स और बेन मेयस ने उम्मीद जगाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों की सधी रणनीति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। कैलेब फाल्कनर की जुझारू शतकीय पारी ने स्कोरबोर्ड को सम्मानजनक बनाया, पर जीत की दूरी बहुत ज़्यादा थी। पूरी इंग्लिश टीम 311 पर सिमट गई।
भारतीय गेंदबाज़ी में आरएस अंबरीश की धारदार गेंदें निर्णायक रहीं, जबकि दीपेश देवेंद्रन और कनिष्क चौहान ने लगातार दबाव बनाए रखा। यह जीत सिर्फ एक फाइनल नहीं थी, बल्कि भारत के अंडर-19 सिस्टम की निरंतर सफलता का प्रमाण थी। 2000 से शुरू होकर 2008, 2012, 2018, 2022 और अब 2026—भारत ने छठी बार दुनिया को बता दिया कि भविष्य की क्रिकेट महाशक्ति किसके पास है। दूसरी ओर, इंग्लैंड के लिए 1998 की यादें अब भी उनकी एकमात्र उपलब्धि बनकर रह गई हैं।