छत्तीसगढ़ में अमित शाह का हाई-स्टेक दौरा: डेडलाइन से पहले नक्सलवाद पर आखिरी रणनीतिक मंथन, पंडुम महोत्सव से जाएगा सख्त संदेश

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज 7 फरवरी से छत्तीसगढ़ के तीन दिवसीय दौरे पर हैं और इसे महज़ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक चरण की शुरुआत माना जा रहा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक अमित शाह आज शाम करीब 7 बजे रायपुर पहुंचेंगे और इसके साथ ही राज्य में नक्सल विरोधी रणनीति को लेकर उच्च स्तर की हलचल शुरू हो जाएगी।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की घोषित डेडलाइन अब बेहद करीब मानी जा रही है। यह समयसीमा खुद अमित शाह ने तय की थी और इसके बाद से छत्तीसगढ़ सहित सभी नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के ऑपरेशन लगातार तेज किए गए हैं। माना जा रहा है कि अब समयसीमा के अंतिम चरण में पहुंचते-पहुंचते यह दौरा जमीनी कार्रवाई की दिशा और रफ्तार दोनों तय करेगा।

सरकारी कार्यक्रम के अनुसार रायपुर पहुंचने के लगभग एक घंटे बाद ही रात 8 बजे अमित शाह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अहम बैठक करेंगे। यह बैठक होटल मेफेयर में होगी, जिसमें केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों, अर्धसैनिक बलों और इंटेलिजेंस से जुड़े शीर्ष अधिकारी शामिल रहेंगे। इसके अगले दिन यानी 8 फरवरी की सुबह 10:30 बजे नक्सलवाद (LWE) पर उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक प्रस्तावित है। अधिकारियों के मुताबिक इसे 31 मार्च की डेडलाइन से पहले की लगभग अंतिम बड़ी समीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।

इस बैठक में छत्तीसगढ़ के साथ-साथ तेलंगाना, महाराष्ट्र और ओडिशा से जुड़े नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति, अब तक हुए ऑपरेशनों की प्रगति और इंटेलिजेंस इनपुट्स पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। यही वह मंच होगा, जहां यह तय किया जाएगा कि किन इलाकों में ऑपरेशन और तेज किए जाएंगे और किन क्षेत्रों में रणनीति बदली जाएगी।

8 फरवरी की शाम 4:30 बजे अमित शाह एक राष्ट्रीय कॉनक्लेव में भी शामिल होंगे, जो रायपुर के होटल मेफेयर में ही आयोजित किया गया है। इसके बाद 9 फरवरी को उनका दौरा बस्तर की ओर मुड़ जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम महोत्सव-2026 के समापन समारोह में सुबह 11:45 बजे शिरकत करेंगे। इससे पहले भी अमित शाह इस महोत्सव में शामिल होकर बस्तर और आदिवासी समाज को सीधे संदेश दे चुके हैं।

राज्य प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इस दौरे को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में हैं। रायपुर से लेकर बस्तर तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। माना जा रहा है कि इन बैठकों के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में ऑपरेशन और ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं और जमीनी स्तर पर उनकी रफ्तार साफ तौर पर बढ़ेगी।

कुल मिलाकर अमित शाह का यह छत्तीसगढ़ दौरा सिर्फ समीक्षा नहीं, बल्कि नक्सलवाद के खिलाफ तय समयसीमा से पहले आखिरी निर्णायक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में इसके असर जमीनी हालात और सुरक्षा अभियानों में साफ नजर आ सकते हैं।

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