देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India ने वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही में शानदार प्रदर्शन किया है। अक्टूबर–दिसंबर (Q3FY26) के दौरान बैंक का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 14% बढ़कर ₹21,876 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹19,175 करोड़ था। मजबूत आय, नियंत्रित खर्च और एसेट क्वालिटी में सुधार ने नतीजों को सहारा दिया।
इसी तिमाही में SBI की कुल आय ₹1.85 लाख करोड़ रही, जो एक साल पहले ₹1.67 लाख करोड़ थी—यानी 11% की बढ़त। ब्याज से होने वाली कमाई भी 5% बढ़कर ₹1.30 लाख करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल ₹1.24 लाख करोड़ थी। यह संकेत देता है कि बैंक का कोर लेंडिंग बिज़नेस स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।
एसेट क्वालिटी मोर्चे पर भी राहत मिली है। Q3FY26 में बैंक का स्टैंडअलोन नेट NPA 16% घटकर ₹18,012 करोड़ रह गया, जबकि अक्टूबर–दिसंबर 2025 में यह ₹21,377 करोड़ था। यानी खराब कर्ज की वसूली और नियंत्रण में ठोस सुधार दिखा है—जो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है।
स्टैंडअलोन और कंसॉलिडेटेड नतीजों का फर्क समझना भी जरूरी है। स्टैंडअलोन रिजल्ट बैंक की मूल इकाई के प्रदर्शन को दिखाते हैं, जबकि कंसॉलिडेटेड नतीजों में उसकी सभी सब्सिडियरी और ग्रुप कंपनियों का संयुक्त असर शामिल होता है। इसी तरह NPA वह कर्ज होता है जिसकी किस्त या ब्याज 90 दिन से ज्यादा समय तक नहीं चुकाया गया हो—और यही बैंकिंग जोखिम का अहम पैमाना है।
शेयर बाजार में भी SBI का प्रदर्शन निवेशकों को खुश कर रहा है। शुक्रवार को शेयर 0.70% की हल्की गिरावट के साथ ₹1,066 पर बंद हुआ, लेकिन तस्वीर बड़ी है—एक महीने में 6%, छह महीने में 32% से ज्यादा और एक साल में करीब 45% का रिटर्न। बैंक का मार्केट कैप करीब ₹9.84 लाख करोड़ है।
सरकारी हिस्सेदारी और वैश्विक मौजूदगी के लिहाज से भी SBI की पकड़ मजबूत है। भारत सरकार की बैंक में 55.5% हिस्सेदारी है। 1 जुलाई 1955 को स्थापित इस बैंक का मुख्यालय मुंबई में है। देशभर में 22,500 से ज्यादा शाखाएं, 50 करोड़ से अधिक ग्राहक और 29 देशों में संचालन—इन आंकड़ों के साथ SBI भारतीय बैंकिंग सिस्टम की रीढ़ बना हुआ है।