छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में अश्लील डांस कांड के बाद हटाए गए तत्कालीन एसडीएम तुलसीदास मरकाम को लेकर प्रशासनिक हलकों में असहज स्थिति बनी हुई है। आधिकारिक रिकॉर्ड में मैनपुर एसडीएम का अतिरिक्त प्रभार अब भी देवभोग एसडीएम के पास दर्ज है, इसके बावजूद तुलसीदास बिना किसी बहाली आदेश के कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते, ज्ञापन लेते और सरकारी आयोजनों में मौजूद दिखाई दे रहे हैं। जिला प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह नियमविरुद्ध है और इसी वजह से उन्हें बार-बार नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नोटिस कार्यालय रिकॉर्ड, ईमेल और व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे गए, लेकिन आरोप है कि तुलसीदास ने उन्हें लगातार नजरअंदाज किया। स्थिति यहां तक पहुंची कि नोटिस की तामील के लिए कलेक्टर को पुलिस की मदद लेनी पड़ी। किसी भी तरह की प्रशासनिक सुनवाई या आदेश जारी करने से रोकने के लिए उनकी वेबसाइट आईडी भी ब्लॉक कर दी गई है। कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने स्पष्ट किया कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि वे सरकारी अधिकारों का उपयोग न कर सकें।
पूरा विवाद 16 जनवरी से जुड़ा है, जब कमिश्नर ने तुलसीदास मरकाम को डिप्टी कलेक्टर पद से निलंबित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने Chhattisgarh High Court का दरवाजा खटखटाया। 29 जनवरी को हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर अंतरिम रोक लगाई, जिससे उन्हें राहत मिली, लेकिन अदालत के आदेश में कहीं भी एसडीएम पद पर दोबारा बहाली का उल्लेख नहीं था। इसके बावजूद 30 जनवरी से तुलसीदास मैनपुर एसडीएम कार्यालय में बैठने लगे और कलेक्टर व कमिश्नर से कार्यालयीन पत्राचार भी कर लिया।
मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गरमाने लगा है। जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप ने 3 फरवरी को मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव Subodh Singh को पत्र सौंपकर तुलसीदास की गतिविधियों को गंभीर प्रशासनिक अनियमितता और पद के दुरुपयोग की श्रेणी में बताया है। पत्र में मांग की गई है कि नियमों के खिलाफ कुर्सी पर बैठे अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
इस पूरे प्रकरण की जड़ दिसंबर में हुए उस विवादित आयोजन से जुड़ी है, जब गरियाबंद के उरमाल में छह दिवसीय ओपेरा के नाम पर अश्लील डांस कार्यक्रम आयोजित हुआ। 29 दिसंबर 2025 को मैनपुर एसडीएम से अनुमति लेकर आयोजित इस कार्यक्रम में ओडिशा के कटक की जय दुर्गा ओपेरा की डांसर्स को बुलाया गया था। 8 से 10 जनवरी के बीच चले कार्यक्रम में अर्धनग्न डांस के वीडियो सामने आए, जिनमें एसडीएम और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी भी दिखाई दी। आरोप है कि बार डांसरों को भारी फीस दी गई, टिकट 200 से 400 रुपये तक बेचे गए और खुलेआम अश्लीलता हुई।
देवभोग थाना प्रभारी फैजुल शाह के अनुसार, शिकायत के बाद आयोजनकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, हालांकि बाद में मुचलके पर छोड़ दिया गया। अब जिला प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी अदालत में पेश करने और शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है। सवाल यही है कि जब आधिकारिक तौर पर प्रभार किसी और के पास है, तो बिना आदेश कुर्सी पर बैठे अधिकारी पर कार्रवाई कब और कैसे होगी—और क्या प्रशासन अपनी ही व्यवस्था को लागू करा पाएगा।