मार्केट का गाढ़ा, मलाईदार और हल्का मीठा दही देखते ही मन करता है कि काश वैसा ही दही घर पर भी जम जाए। लेकिन अक्सर घर में जमा दही या तो खट्टा हो जाता है, या पानी छोड़ देता है, या फिर बिल्कुल पतला रह जाता है। नतीजा वही—मेहनत बेकार और स्वाद फीका। सच यह है कि दही जमाने का काम जितना आसान लगता है, उतना ही संवेदनशील भी होता है। दूध का तापमान, जामन की मात्रा और रखने की जगह—इन तीनों में ज़रा सी चूक पूरी सेटिंग बिगाड़ देती है।
सबसे बड़ी गलती अक्सर तापमान को लेकर होती है। कई लोग उबलते दूध में ही जामन मिला देते हैं, तो कुछ लोग दूध को पूरी तरह ठंडा होने देते हैं। दोनों ही हालात में दही सही नहीं जमता। दही के अच्छे बैक्टीरिया को काम करने के लिए दूध का गुनगुना होना जरूरी है—इतना कि उंगली डालने पर न जलन हो, न ठंडक, बस हल्की गर्माहट महसूस हो। यही वह पल है, जब जामन डालना चाहिए।
जामन की मात्रा भी उतनी ही अहम है। एक लीटर दूध के लिए आधा चम्मच ताज़ा, बिना खट्टापन वाला दही काफी होता है। जामन को दूध में अच्छी तरह घोल देना चाहिए ताकि वह हर हिस्से में बराबर फैले। ज्यादा जामन डालने से दही जल्दी जम तो जाता है, लेकिन स्वाद खट्टा हो जाता है; कम जामन डालने पर दही जमने में ही अटक जाता है।
अब आती है असली सीक्रेट ट्रिक—दही को सही माहौल देना। जामन मिले दूध के बर्तन को ढककर ऐसी जगह रखें, जहां हल्की गर्माहट बनी रहे। सर्दियों में बर्तन को ऊनी कपड़े में लपेट देना या माइक्रोवेव/ओवन में सिर्फ लाइट ऑन करके रखना कमाल कर देता है। यही हल्की गर्मी दही को गाढ़ा, सेट और मलाईदार बनाती है।
जब दही जम जाए, तो देर न करें। उसे तुरंत फ्रिज में रख दें ताकि खट्टापन न बढ़े और दही पानी न छोड़े। बाहर ज्यादा देर रखने से दही की सेटिंग ढीली पड़ सकती है। फुल-क्रीम दूध का इस्तेमाल, दूध को अच्छी तरह उबालकर गुनगुना करना, पिछले दिन के अच्छे दही से जामन लेना और जमाते समय बर्तन को न हिलाना—ये छोटी-छोटी बातें मिलकर वही मार्केट जैसा मोटी मलाई वाला दही देती हैं, जिसकी तलाश हर घर में रहती है।