लेखा आपत्तियों पर सख्ती: नगरीय प्रशासन ने मांगी पूरी और स्पष्ट जानकारी, विधानसभा समिति करेगी जांच

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में ऑडिट के दौरान सामने आए घपले-घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब प्रशासनिक सख्ती का रूप ले लिया है। राज्य संपरीक्षा विभाग की रिपोर्ट में बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होने के बाद जब नगरीय निकायों से जवाब मांगा गया, तो कई जगहों से आधी-अधूरी और अस्पष्ट जानकारियां सामने आईं। इस पर छत्तीसगढ़ नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित निकायों को चार दिनों के भीतर सही, तथ्यात्मक और पूरी जानकारी देने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

दरअसल, छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा विभाग द्वारा अंकेक्षित स्थानीय नगरीय निकायों, पंचायत राज संस्थाओं, अनुदान प्राप्त और अन्य स्वायत्तशासी संस्थाओं का वार्षिक प्रतिवेदन 2023-24 जुलाई 2025 के विधानसभा सत्र में पटल पर रखा गया है। इस प्रतिवेदन के आधार पर स्थानीय नगरीय निकाय एवं पंचायती राज लेखा समिति द्वारा लेखा आपत्तियों का परीक्षण किया जाना है। इसी क्रम में संबंधित विभागों और निकायों से आपत्तियों से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, लेकिन कई निकायों ने अपेक्षित स्तर की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।

ऑडिट रिपोर्ट के निष्कर्ष गंभीर हैं। इसमें आंतरिक नियंत्रण प्रणाली की कमजोरियां, तय प्रक्रियाओं और नियमों का पालन न होना, प्रशासनिक विफलता, राजस्व हानि, कम मूल्यांकन और कम दरों पर उद्धरण स्वीकृत करने जैसे मामले सामने आए हैं। इन खामियों ने नगरीय निकायों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं और यही वजह है कि अब मामले को विधानसभा स्तर पर परखा जाएगा।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस प्रकरण में संबंधित नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों के आयुक्तों तथा सीएमओ को निर्देशित किया है कि वे पूर्व में दी गई त्रुटिपूर्ण जानकारियों को सुधारते हुए तथ्यात्मक विवरण प्रस्तुत करें। जिन निकायों की जानकारी सही नहीं पाई गई है, उनमें नगर निगम धमतरी, रायपुर, बीरगांव, दुर्ग, राजनांदगांव, जगदलपुर, अंबिकापुर, कोरबा, रायगढ़ और चिरमिरी शामिल हैं। इसके अलावा नवापारा, बागबहरा, सिमगा, नेवरा, बैकुंठपुर, महासमुंद, सक्ती, कोंडागांव, भाटापारा, सुकमा, किरंदुल, चांपा समेत बड़ी संख्या में नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतें भी सूची में हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समय सीमा के भीतर सही जानकारी नहीं दी गई, तो इसे गंभीर लापरवाही माना जाएगा। आने वाले दिनों में विधानसभा की समिति इन लेखा आपत्तियों का विस्तार से परीक्षण करेगी और उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। कुल मिलाकर, नगरीय निकायों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को लेकर अब सख्ती का दौर शुरू होता दिखाई दे रहा है।

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