टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को अपने परिवार के साथ रहने की अनुमति नहीं होगी। Board of Control for Cricket in India ने टीम मैनेजमेंट की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें खिलाड़ियों की पत्नियों और मंगेतरों को टीम होटल में साथ ठहराने की इजाजत मांगी गई थी। बोर्ड का रुख साफ है—टूर्नामेंट के दौरान टीम की एकाग्रता सर्वोपरि है और इसी नीति के तहत यह फैसला लिया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि ICC Men’s T20 World Cup जैसे आईसीसी और मल्टीनेशन टूर्नामेंट्स में परिवार के साथ ठहरने की छूट नहीं दी जाती। हालांकि, अगर कोई खिलाड़ी अपने परिवार के लिए अलग होटल में ठहरने की व्यवस्था करना चाहता है, तो वह यह अपने खर्च पर कर सकता है। इस व्यवस्था में बोर्ड की कोई भूमिका नहीं होगी—न बुकिंग, न लॉजिस्टिक्स।
भारत इस टी-20 वर्ल्ड कप का सह-मेजबान है और बोर्ड का आकलन है कि टीम को केवल पाकिस्तान से मुकाबले के लिए श्रीलंका जाना है। ऐसे में लंबे विदेशी दौरे जैसी परिस्थितियां नहीं बनतीं, जिनमें परिवार को साथ रखने की जरूरत पड़ती हो। इसी तर्क के आधार पर मैनेजमेंट की मांग को नामंजूर किया गया है।
यह फैसला हाल के वर्षों में बदली नीतियों का हिस्सा भी है। बोर्ड की मौजूदा नीति के अनुसार, यदि कोई विदेशी दौरा 45 दिनों से अधिक का हो, तो खिलाड़ियों के परिवार अधिकतम 14 दिनों तक साथ रह सकते हैं—लेकिन यह नियम आईसीसी या मल्टीनेशन टूर्नामेंट्स पर लागू नहीं होता। कोविड-19 के बाद पूरे दौरे में परिवार को साथ रखने की परंपरा शुरू हुई थी, मगर बॉर्डर–गावस्कर ट्रॉफी 2024–25 में हार के बाद बोर्ड ने अनुशासन और फोकस पर दोबारा जोर देते हुए नियमों को सख्त किया।
बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि जारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसी असाधारण स्थिति में छूट चाहिए तो खिलाड़ी को चयन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कोच से पूर्व अनुमति लेनी होगी। नियम तोड़ने पर टूर्नामेंट, सीरीज और यहां तक कि आईपीएल में खेलने पर रोक, सैलरी/कॉन्ट्रैक्ट पर असर जैसी कड़ी कार्रवाई तक की जा सकती है।
कुल मिलाकर, संदेश स्पष्ट है—टी-20 वर्ल्ड कप के दौरान टीम का फोकस और अनुशासन सर्वोपरि रहेगा, और परिवार से जुड़ी सुविधाएं निजी व्यवस्था के दायरे में ही सीमित रहेंगी।