टेक दुनिया में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की नई एआई नीति को लेकर उसकी पैरेंट कंपनी Meta यूरोपीय नियामकों के निशाने पर आ गई है। European Union ने कंपनी को साफ चेतावनी दी है कि यदि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर अन्य एआई चैटबॉट्स के लिए रास्ते नहीं खोले, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
विवाद की जड़ यह आरोप है कि WhatsApp अब केवल ‘Meta AI’ को प्राथमिकता दे रहा है और अन्य लोकप्रिय एआई सेवाओं—जैसे ChatGPT और Perplexity AI—को अपने प्लेटफॉर्म पर सीमित या अवरुद्ध कर रहा है। यूरोपीय आयोग का मानना है कि यह कदम निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के सिद्धांतों के खिलाफ हो सकता है और बाजार में एकाधिकार की स्थिति पैदा कर सकता है।
EU अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े यूज़र बेस वाले प्लेटफॉर्म पर अगर केवल एक ही एआई सिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा, तो इससे नवाचार और प्रतिस्पर्धा दोनों प्रभावित होंगे। यूरोप में डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) जैसे नियमों के तहत बड़ी टेक कंपनियों को निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना अनिवार्य है। ऐसे में Meta पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म को अन्य एआई सिस्टम्स के लिए भी खुला रखे।
मामला सिर्फ यूरोप तक सीमित नहीं है। भारत जैसे देशों में, जहां करीब 50 करोड़ से ज्यादा लोग WhatsApp का इस्तेमाल करते हैं, यह नीति उपयोगकर्ताओं के विकल्पों को सीधे प्रभावित कर सकती है। यदि प्लेटफॉर्म पर केवल Meta AI ही उपलब्ध रहेगा, तो यूज़र्स के पास एआई के मामले में सीमित विकल्प बचेंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि Meta अपनी नीति में बदलाव करता है या नियामकीय कार्रवाई का सामना करता है। टेक इंडस्ट्री में यह मामला डिजिटल प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता विकल्पों की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।